'नूतन वर्ष'
बीते बरस की बीती बातें,नूतन
का अभिनंदन हो ,
शुभ विचार ,प्रफुल्लित मन
से ,प्रभु चरणों में वंदन हो .
संकल्प नए कुछ, सोच नई
हो,बुरी आदतों का मर्दन हो
ऊर्ज़ावान हो, मन उल्लासित,हर भाव सुधा हो , चन्दन हो
दीन -हीन व्याकुल जन हित ,उदार जनों का संबल हो
वैचारिक मतभेद से उपजे, रुग्ण सम्बंध पुनरूर्जित हों .
हो वैभव ,सुख -संपन्न देश ,
ना कहीं करुण,भयाभय क्रन्दन हो .
ये नयावर्ष सुमधुर गीत हो ,मन -मयूर नृत्य हित उन्मत हो .
-अंशु चौहान

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