'तुम्हारी याद'


भूलना चाहता हूँ मगर तुम्हारी याद दिला देती है 

 तन्हाई अक्सर मेरे गम को बढ़ा देती है

सिगरेट के धुएँ सा जलता है मेरा दिल 

हर एक आह सीने की जलन बढ़ा देती है 

गयी हो जब से तुम खाली सा हो गया हूँ 

हर बात बीती हुई,उदास सी मेरी शाम बना देती है 

ढूँढता हूँ घर के हर एक कोने में तुम्हें 

बिखरी हुई हर चीज़ तेरे अवसान की तहरीर बता देती है 

तुम थीं तो तुम्हारी क़द्र ना थी कभी 

अधूरी हर चीज़ अब तेरी क़ीमत बता देती है। 

-अंशु चौहान 



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