सुंदरता
'सुंदरता 'एक ऐसा तत्व जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। सुंदरता की परिभाषा और इसके मापदंड सबके लिए अलग -अलग हो सकते हैं। किसी व्यक्ति की नज़रों में एक व्यक्ति सुन्दर हो सकता है परन्तु दूसरे की नज़र में कोई और। इसलिए सान्सारिक लोगों की सुंदरता के मायने अलग हैं। यहाँ कुछ लोगों की दृष्टि में बहुत गौरा ,लम्बा -चौड़ा (अध्यात्म रहित ,अक्खड़ स्वभाव का व्यक्ति सुन्दर हो सकता है। कुछ लिपि-पुती महिलाएँ सुन्दर हो सकती हैं। कुछ की नज़रों में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाला ,महंगी पोशाक में लिपटा ,चमकता हुआ (क्रीम से पुता )व्यक्ति सुन्दर हो सकता है। लेकिन मेरी नज़रों में या यूँ कहें सुंदरता के वास्तविक नज़रिये से एक किसी कुटिया में रह रहा ,पवित्र आचरण वाला ,साधारण से लिबास में लिपटा ,आध्यात्मिक आभा से युक्त व्यक्ति सर्वाधिक आकर्षक व सुन्दर है।
आचरण की पवित्रता ,अध्यात्म की चमक ही व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता होती है मगर इसे महसूस करने के लिए आँखों में वही पवित्रता होना भी ज़रूरी है।
इस भौतिक जगत के लोग चाहे कितने सौंदर्य प्रसाधन अपना लें ,चाहे कितनी नयी वेश-भूषायें आजमा लें ,उन आध्यात्मिक व्यक्तियों जैसा आकर्षण नहीं पा सकते जिनका रोम-रोम ईश्वर के रूप दर्शन कर निहायत आकर्षक और पवित्र हो चुका है।
सबसे सुन्दर तो इस सृष्टि में सिर्फ़ ईश्वर हैं ,हमारे कृष्णा जी और राधिका जी हैं। जब उनकी पवित्र ,आकर्षक छवि हृदय में बसी हो तो अन्यत्र कहाँ सौंदर्य दिखाई दे ?ईश्वर के रूप दर्शन के बाद तो हर रूप फ़ीका है। जिसने प्रभु रूप -रस पान कर लिया ,उनके रूप माधुर्य में डूब कर, फिर कहाँ सौंदर्य ,कहाँ आकर्षण।तो सुंदरता में डूबना है तो कृष्ण और राधा जी में डूबें। सुंदरता का गुणगान करना है तो कृष्ण और राधा जी की करें। सुंदरता के पीछे पागल होना है तो प्रभु की सुंदरता में हो कर देखें।
याद रखिये इस दुनिया में किसी व्यक्ति में थोड़ी सी भी सुंदरता है तो वो काम देव से आती है जबकि कामदेव अपनी सुंदरता का थोड़ा सा ही अंश इन्हे देते हैं.तो आप सोचिये कि कामदेव ख़ुद कितने सुन्दर होंगे ,लेकिन यही कामदेव जब कृष्ण जी की सुंदरता को देखते हैं तो बेहोश हो जाते हैं क्योंकि वो सोचते हैं कि कोई इतना सुन्दर कैसे हो सकता है और बेहोश हो जाते हैं। इसलिए कृष्ण जी का एक नाम मदन मोहन भी हैअर्थात काम देव को भी मोहित कर देने वाले। अब जब यही कृष्ण श्री राधे को देखते हैं तो बेहोश हो जाते हैं क्योंकि कृष्ण सोचते हैं कि कोई इतना सुन्दर कैसे हो सकता है इसलिए राधा रानी जी का एक नाम है मदनमोहन मोहिनी। मदन को मोहने वाले को भी मोहने वाली। अब आप सोचिये कि इस सृष्टि में सबसे सुन्दर कौन है?
इसलिए असली सुंदरता की शरण में जाइये प्राकृतिक और असली सुंदरता पाने के लिए, पार्लर में नहीं। वरना बस ग़लत फहमी के शिकार बने रहेंगे कि हम सुन्दर हैं। आपकी आत्मा को अध्यात्म रुपी पार्लर की ज़रूरत है। इस फ्री पैकेज में शरीर का सौंदर्यीकरण मुफ़्त और स्वतः शामिल है।
अब इसे छोड़कर भी आप ब्यूटी पार्लर में जाकर भूतिया और आभासिक सौंदर्य पाना चाहते हैं तो आपकी मर्ज़ी।

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