लड्डू गोपाल








कलयुग में 'भक्ति' ही इंसान के उद्धार का एकमात्र साधन है। विशुद्ध (निष्काम )भक्ति से ईश्वर को सहज ही पाया 

जा सकता है। भक्ति के प्रकार भी अलग-अलग हो सकते  हैं और सबके ईष्ट भी अलग -अलग। कुछ शिव जी को 

मानते हैं ,कुछ राम जी को ,कुछ माँ दुर्गा को, कुछ कृष्णा जी को और कुछ इन सभी को। कृष्ण का स्वरूप  

चंचल,नटखट ,और सर्वाकर्षक होने के कारण अधिकतर भक्त गण  कृष्ण जी के प्रति आकर्षित हो जाते है.

कृष्णा जी का बालरूप( लड्डू गोपाल )रूप आज कलयुग में लोगों को अत्यधिक आकर्षित कर रहा है। इसलिए 

आजकल एक होड़ सी मच  गयी है लड्डू गोपाल जी को घर मे लाने की।


 ईश्वर भक्ति किसी भी रूप में की जाये ग़लत नहीं है लेकिन भक्ति का सम्बन्ध आत्मा से है इसलिए इसमें दिखावा 

नहीं होना चाहिए।कई लोग आजकल देखा -देखी से या इस भावना से लड्डू गोपाल जी को घर पर लाते हैं कि 

उनको  लाने से उनकी सारी मनोकामनायें पूरी हो जाएंगी, तो ऐसी भावना से नहीं बल्कि सेवा करने की भावना से 

लाएं। साथ ही उनको उठाकर यहाँ -वहाँ न ले जायें क्योंकि अगर आप बाल रूप में मान रहे हो तो एक छोटे बच्चे 

की तरह ही आपको उनका ध्यान रखना पड़ेगा नहीं तो अपने चंचल स्वभाव और बचकानी वृत्ति के कारण वो कहीं 

भी भाग सकते हैं.उस स्थति में उनका वहाँ से गायब हो जाना ,खो जाना ग़लत कहलायेगा। साथ ही हर तरह की 

शुद्धता का भी ध्यान रखना है क्योंकि वो सिर्फ बालक ही नहीं ईश्वर भी हैं तो मानसिक और शारीरिक पवित्रता का 

भी उतना ही ध्यान रखना है। 


याद रहे अगर आपके किसी व्यव्हार से उन्हें बुरा लगा तो वो आपके घर से ग़ायब भी हो सकते हैं। साथ ही आपकी 

गन्दी वृत्तियों की वजह से वो आपके जीवन में और ज़्यादा कष्ट भी दे सकते हैं इसलिए ईश्वर से लड्डू -पेड़े पाने की 

आशा की जगह, उनको सेवा-भोग प्रदान करने की कोशिश करें। 


किसी की देखा -देखी  करके भी अगर आपको भक्ति करने की इच्छा हुई है तो उसे दिल से स्वीकार करें। मन से 

करें क्योंकि भक्ति ऐसी चीज़ है कि यहाँ आपका दिखावा किसी काम का नहीं है। 

ईश्वर को पाना है ,उन्हें महसूस करना है तो भीतर से जुड़िये .नियम,पूजा से भी ज़्यादा ज़रूरी है,आंतरिक समर्पण। 

किसी को दिखाने,प्रभावित करने के लिए नहीं सिर्फ़ प्रभु को प्रभावित करने के लिए होनी चाहिए। दुनिया के द्वारा 

श्रेष्ठ समझे जाने से नहीं बल्कि ईश्वर की नज़रों में श्रेष्ठ होने से आपका उद्धार होगा,तो दुनिया अपनी कोई भी गणित 

लगाए ,आपकी निंदा करे,मज़ाक बनाये कोई फ़र्क नहो पड़ना चाहिए। 

दुनिया की बुद्धि उस परम सत्ता के सामने बड़ी तुच्छ सी है। 

उस परम सत्ता की किसी चीज़ को समझना इसके वश की बात नहीं है। 


आप लड्डू गोपाल जी की सेवा पूर्ण समर्पण से करें,उन्हें एक खिलौना न समझें। लड्डू गोपाल जी को खिलौना 

समझ कर घर लाना आपके लिए भारी पड़ सकता है क्योंकि जिसे आप खिलौना समझ कर घर लाएं हैं वो सम्पूर्ण 

पृथ्वी का मालिक है। 

पूरी निष्ठा और पवित्रता के साथ उनकी सेवा कीजिये अन्यथा मत लाइए घर पर उन्हें । मज़ाक मत बनाइये प्रभु का। 

आपकी सारी  क्रियाएँ रिकॉर्ड हो रही हैं,उसके पास। ऐसा न हो कि बहुत कुछ पाने के लालच में आप अपना सब 

कुछ खो दें। उनके सामने हर वक्त अपनी कामनाओं की अर्ज़ी मत लगाते रहिये। उनके लिए अपनी इच्छाओं का 

समर्पण करने की कोशिश कीजिये।  

कुछ लोग तो इस  भावना से ही उन्हें घर पर लाते हैं कि अमुक के घर लड्डू गोपाल जी के आने से काफी धन 

सम्पदा आ गई है तो हमारे यहाँ भी आ जाएगी।

इस बात का स्मरण रखिये कि लालची लोग भगवान को बिलकुल प्रिय नहीं हैं।

अगर आप इस भावना से उन्हें घर लाएंगे तो हो सकता है कि सब कुछ आपकी इच्छा के विपरीत हो जाये।आपने 

देवरानी-जेठानी से सम्बंधित गणेश जी की वो प्रचलित कहानी तो सुनी ही होगी, जिसमें देवरानी निष्काम भाव से 

प्रभु भक्ति करती है और जेठानी लालच के वशीभूत होकर।अंत में क्या परिणाम होता है वो आप जानते ही होंगे।  

इसलिए सेवा लेने के लिए नहीं बल्कि उनकी सेवा करने के लिए  ही उन्हें घर लाएं। साथ ही मन और तन की 

पवित्रता का पूरा ध्यान रखें उनकी सेवा के वक़्त और खिलौना बनाकर इधर -उधर लिए न घूमते रहें।  



देखिए एक और सच को जान लेना आपके लिए बहुत ज़रूरी है कि प्रभु का विग्रह या लड्डू गोपाल जी घर में लाने  

मात्र से आपका उद्धार नहीं हो जाएगा। 

कर्म की जीवन में बहुत बड़ी महत्ता है। कर्मों का फल तो हमे भोगना ही पड़ता है। 

अगर आप ये सोचे की प्रभु के विग्रह की दिन रात सेवा करके और मन में किसी व्यक्ति के प्रति द्वेष ,बदले की 

भावना,गंदे भाव रख कर आपकी उन्नति हो सकती है तो ये आपकी भ्रमित बुद्धि की सोच है। 

आपको सारी चीज़े कर्मों के हिसाब से मिलती हैं. जब तक कर्म अच्छे हैं सब अच्छा चलता रहेगा और जैसे ही अच्छे 

कर्मों का खाता खाली हुआ बुरे दिन शुरू हो जाएँगेले किन प्रभु की शरण में चले गए ,सब उनको सौंप दिया ,मन 

को पवित्र कर लिया तो वो आपको हर परस्थिति में सँभाल लेंगे ।कभी तन्हा नहीं होने देंगे ।टूटने -बिखरने नहीं 

देंगे और इसके लिए ज़रूरी नहीं है कि लड्डू गोपाल जी को ही आप घर लाएं। आपके घर में या आपके मन मंदिर 

में  प्रभु का कोई भी विग्रह हो आप बिना किसी कामना के,उनके प्रति समर्पित भाव से उनकी पूजा करें।वो प्रसन्न 

ज़रूर होंगे। 

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