ये चिड़ियाघर नहीं है भाई
मैंने एक बार घर में एक बिल्ली पाली थी। पाली क्या थी गले पड़ गई थी भाई साहब । बिल्ली ही नहीं उसका परिवार भी।
बिल्ली के २ बच्चे ,उसका पति सब का नाश्ता पानी मेरे ही सर आ गया था। पशु-पक्षी के प्रति प्रेम भाव के
कारण हमने ये पंगा लिया था । ख़ैर जैसे -तैसे करके हमने २-३ महीने इस परिवार की सेवा की।
जैसे-तैसे इसलिए नहीं कि इन्हे खिलाने में असमर्थ थे बल्कि इसलिए कि किसी भी पक्षी या पशु को पालकर उसकी
स्वतंत्रता ,उसका स्वच्छंद वातावरण नहीं छीनना चाहते थे । साथ ही इनकी कुछ वृत्तियाँ और हमारी कुछ
विवशताएँ थीं जिनके रहते ये सब कर पाना मुश्किल था।अतः मेरी इच्छा की सुनवाई हुई और कुछ समय बाद ये
स्वं ही अपने -अपने चयनित स्थान की तरफ़ गमन कर गए और फिर कभी इनके दर्शन नहीं हुए।
एक लम्बे अंतराल के बाद कुछ बिल्लियां और उनके बच्चे आस -पास ,फिर से दिखाई दिए। ये कोई अन्य परिवार
था । हमारे मन में भय उत्पन्न हुआ कि ये लोग फिर से कहीं गले ना पड़ जाएं इसलिए हमने तुरंत एक कुत्ते की
व्यवस्था कर ली। अरे भई ! इतने क्रूर नहीं हैं, नकली वाला (शॉफ्ट टॉयज )था।
हमने इसको मुख्य दरवाजे के पास ही रख दिया था।इसका प्रभाव ये हुआ कि कोई भी बिल्ली डर के मारे अंदर
नहीं आ पाई ,काफ़ी दिन तक। मगर अभी कुछ दिन से हमने बिल्ली जैसे ही आकार का एकदम हृष्ट-पुष्ट,एक
मुश्टण्डा चूहा देखा है,सो अब फिर से भय ग्रसित हो गए हैं। मतलब जिससे मुक्त होने के लिए कुत्ते की व्यवस्था
की थी ,अब उसी को वापस बुलाने की व्यवस्था करनी होगी।
नहीं !मगर इस बार सॉफ़्ट टॉयज वाली ही बिल्ली लाएंगें,असली वाली नहीं।
मगर सोचती हूँ ये सिलसिला अगर ऐसे ही चलता रहा तो मेरी पॉर्च पर 'एनिमल फ़ूड चेन डिस्प्ले मॉडल तैयार हो
जायेगा,एक दूसरे जानवर को भगाने की कोशिश में।
आख़िर कब तक यूँ ही चलता रहेगा....
कभी बन्दर,कभी चूहे ,कभी बिल्ली ,कभी पक्षी सब यहीं क्योँ बसने की सोचते हैं।लगता है कुछ ज़्यादा ही पॉज़िटिव
एनर्जी मिलती है इन्हे यहाँ। कहते हैं ना कि पक्षी अपना घोंसला वहीँ बनाना पसंद करते हैं जहाँ सकारात्मक ऊर्जा
मिलती है। अब इन सबका इलाज़ खोजना मेरे लिए महाभारत हो गया है।
बंदरों के लिए तो शेर या हाथी भी लाने की प्लानिंग की हुई है। देखते हैं ये आइडिया काम करता है तो। साउंड का
प्रयोग तो करके देख चुके हैं.जब भी बन्दर आते हैं तो स्पीकर लगाकर हाथी या शेर की तेज़ आवाज़ भी इन्हें सुनाते
हैं भयभीत करने हेतु।ये बात और है कि बन्दर इससे एक बार ही सहमते हैं और बाद में जल्दी ही सारा माझरा उन्हें
समझ आ जाता है और वो उतर आते हैं अपने ढीठपने पर।
तो इन सभी उपायों की सफलता की गारण्टी मैं नहीं लेती अगर आप भी ऐसा कुछ करने जा रहें हैं तो,लेकिन इनमें
से कुछ तो प्रभावी हैं ही । बस निर्भर करता हैं कि कौन सा जानवर कितना धूर्त है और कितना फट्टू है ...

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
allowed