'कल्कि मंदिर '(जयपुर)
भारत एक आध्यात्मिक देश है। यहाँ की सभ्यता संस्कृति में अध्यात्म रचा बसा है। ये भूमि ऋषि -मुनियों की तपस्या
स्थली रही है। यहाँ कई बड़े -बड़े संत महात्मा हुए हैं। इसलिए यहाँ का पूरा इतिहास संतों महात्माओं के आध्यात्मिक गुणगान व महिमा से भरा हुआ है।
अब चूंकि संतों-महात्मांओ की भूमि रही है तो अनेकानेक मंदिरों का होना भी लाज़मी है। भारत में लगभग 20 लाख
कुल मंदिर हैं.यहाँ हर राज्य में कई मंदिर मिलेंगे। कुछ मंदिर तो ऐसे हैं जिनसे लगभग सभी परिचित हैं और यहाँ
भ्रमण भी करते रहते हैं। लेकिन कुछ मंदिर ऐसे अज्ञात और रहस्यमयी हैं जिनके बारे में स्वं वहाँ रह रहे लोगों को भी
पता नहीं है।ऐसा ही एक मंदिर है जयपुर के सिरह ड्योढी में स्थित भगवान कल्कि का मंदिर.हवामहल बाजार में स्थित ये मंदिर 3०० साल पुराना है।
ये दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे भगवान के भविष्य में होने वाले अवतार की कल्पना करके बनाया गया है और जहाँ भगवान विष्णु के भविष्य में होने वाले इस अवतार की पहले से ही पूजा भी की जा रही है। ये अवतार है भगवान विष्णु का 10वा अवतार,कल्कि अवतार।
ये मंदिर जयपुर के राजा जयसिंह द्वारा बनवाया गया था.मंदिर बड़ा ही अद्भुत है, रहस्यमयी है।
मंदिर मे एक अद्भुत अश्व (घोड़ा )भी है जिस पर सवार हो कर भगवान कल्कि, कलयुग के अंत हेतु अवतरित
होंगे। इस घोड़े के बारे में कहा जाता है कि इसके बायें पैर में एक घाव है जो धीरे-धीरे अपने आप भर रहा है।
जब ये घाव पूरा भर जाएगा तब ये घोड़ा जीवित हो उठेगा और भगवान कल्कि इस पर सवार हो कर दुष्टों का नाश
करेंगे। इतना ही नहीं अजर -अमर भगवान हनुमान जो कलयुग में अभी मौजूद हैं और कहीं तपस्या में लीन हैं
भगवान कल्कि के सहयोगी बनेंगे। साथ ही अश्वथामा आदि भी अभिशाप से मुक्त हो कर,प्रभु के सहयोगी बनेंगे।
वैष्णों देवी जो भगवान विष्णु के कल्कि रूप का कब से पति रूप में इंतज़ार कर रही हैं आखिर पद्मा (लक्ष्मी)रूप में उनकी पत्नी बनकर उन्हे पा लेंगी।
तो जब भी मौका मिले इस अद्भुत मंदिर के दर्शन करना न भूलें। क्योंकि जयपुर के निवासी होकर भी अगर आप
इस सुख से वंचित रह गए तो आगे बहुत अफ़सोस होगा।
कुल मिलाकर ये कहना पड़ेगा कि हमारी संस्कृति,हमारे प्राचीन मंदिर ,प्राचीन इमारत हमारे पास ये ऐसी धरोहर हैं
जिनका महत्व आज हम समझ नहीं पा रहे हैं। ये हमारे पास ईश्वर प्रदत्त इतना सुन्दर खजाना हैं जिसका हम
संरक्षण नहीं कर पा रहे हैं।
भौतिक चकाचौंध के आकर्षण ने हमे सिर्फ़ सिनेमा हॉल ,मॉल ,क्लब आदि तक सीमित कर दिया है। हम इनके
आकर्षण में वास्तविक आनंद व ज्ञान वर्धन करने वाले सुन्दर मंदिरों व ऐतिहासिक इमारतों के प्रति आकर्षण खो बैठें हैं।
तो अपनी चेतना को जगाइए और इतने सुन्दर अवसर को मत गवाइये।
अगर ईश्वर में आस्था है तो जाइये और गर्व कीजिये अपनी संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहर पर।
एक और चीज ,जब भी किसी मंदिर या तीर्थ स्थल जाएं तो पूरा ध्यान और मन सिर्फ प्रभु में लगायें कपडों के प्रदर्शन और मोबाइल से फोटो लेने में ना लगे रहें.कम से कम इस स्थान पर तो माया के प्रभाव में मत आईये।एकाग्र रखिए मन को प्रभु दर्शन में।


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