दुनिया में हर व्यक्ति की अपनी अलग मनोवृत्ति है, अपना व्यवहार होता है और दूसरे हमें सिर्फ अनुमान के आधार पर ही जानते हैं.हम जैसे हैं वैसे रूप में हमें कोई -कोई ही समझता है।अगर कोई सही से समझ पाता है तो उससे संबंध अच्छे हो जाते हैं जो सही से नहीं समझ पाते उससे संबंध ख़राब हो जाते हैं।
यहाँ पूरी दुनिया एक दूसरे के व्यवहार को अनुमान और अपनी कल्पनाओं के आधार पर ही ग्रहण करती है इसलिए ये सोच कर दुखी नहीं होना चाहिए की अमुक व्यक्ति हमें सही से नहीं समझता.हमें हमारे प्रभु सही से समझे बस। बाकी किसी को समझाने की ज़रूरत नहीं।

किसी सामान्य व्यक्तित्व में इतनी क्षमता नहीं कि किसी अन्य व्यक्ति को सही से समझ सके। ये कार्य सिर्फ ईश्वर से जुड़ा, पवित्र हृदय का व्यक्ति ही कर सकता है .इसलिये प्रभु की नजर में सही बने रहकर निश्चिंत हो कर, हर काम कीजिए और मस्त रहिए।आपको सिर्फ प्रभु को प्रसन्न करना है सांसारिक लोगो को तो कोई कभी खुश कर ही नहीं पाया।उनके पास तो सिर्फ शिकायतों की लंबी सूची और उलाहने ही होते हैं।
प्रभु के बनकर रहिए और सब प्रभु पर छोड़ दीजिए.कोई आपकी चिंता करे, आपको सही से समझ पाए तो ठीक अन्यथा उसे भगवान के ऊपर छोड़ कर बेफिक्र हो जाइये.कुल मिलाकर सामान्य व्यक्ति दिव्य दृष्टि ना होने के कारण एक अंध व्यक्ति की तरह आपको सिर्फ अनुमान के आधार पर ही थोड़ा बहुत जान पाता है.इसलिये जानने में गलती तो होगी ही .

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