मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो

 


 मृत्यु के भय से अगर सही को सही और गलत को गलत ना कह सको,तो सन्देह  करो अपने मनुष्य होने पर .

शक्तिशाली हो कर अगर किसी निर्बल की शक्ति न बन सको,तो संदेह करो अपने शक्तिशाली होने पर.

संपन्न हो कर अगर मदद ना कर सको किसी निर्धन की,तो सन्देह करो अपनी सम्पन्नता पर .

पुरुष हो कर अगर किसी नारी के सम्मान की रक्षा न कर सको,तो संदेह करो अपने पौरुष पर।

धार्मिक हो कर भी अगर धर्म की रक्षा न कर सको, तो धिक्कार तुम्हारे धार्मिक होने पर. 

मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो इस धरा पर,

सिर्फ देह मनुष्य की होना ही मनुष्यता नहीं,

समझो इस ध्येय को तो इंसान हो तुम

 ना समझो तो चारा चर रहो कही।

-




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भीतर की सुन्दर दुनिया में रहें'