संदेश

कुछ हठ ही कर ली है दिल ने, मेरी नही सुनता रोज़ मिन्नतें करती हूँ ,कम्बख़्त नाक़ाम कर देता है ।
एक दुआ ही रख दे ,दुश्मन के हक़ में नफ़रतें ही नहीं ,मोहब्बत भी लौटाएगा कभी । 
 जाते हुए लम्हे रोक लो कोई उन बर्बादियों को नेस्त -नाबूद होती उन आबादियों को समय के गर्त में खो जाऐंगे सुखद लम्हें जी लो बेपरवाह उन आज़ादियों को ।