कुछ हठ ही कर ली है दिल ने, मेरी नही सुनता
रोज़ मिन्नतें करती हूँ ,कम्बख़्त नाक़ाम कर देता है ।
रोज़ मिन्नतें करती हूँ ,कम्बख़्त नाक़ाम कर देता है ।
मेरे इस इंद्रधुनषी रंगों वाले ब्लॉग में किसी 'विषय' विशेष को लेकर रचनाएँ नहीं लिखी गई हैं ,बल्कि मनुष्य के मन में उठने वाले हर भावों और समाज से जुड़ी हर घटनाओं ,हर समस्याओं ,उससे जुड़े खट्टे -मीठे अनुभवों को लेकर ही समस्त रचनायें की गई हैं.जीवन के हर रंग,हर पहलू को अनुभव करने के लिए मेरे ब्लॉग से जुड़े रहें |
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