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प्रेम एक सकारात्मक शब्द है । ईश्वर ने भी प्रेम को बहुत महत्व दिया है परंतु ये याद रहे कि प्रेम में मर्यादा का बहुत महत्व है। प्रेम का स्वरूप क्या है ये मायने रखता है । अमर्यादित प्रेम करने वाला हमेशा दंड का भागीदार होता है चाहे वह दंड ईश्वर द्वारा निर्धारित किया जाए या लोगों द्वारा ।प्रश्न ये उठता है कि कई बार प्रेम करने वालों को दंड क्यों मिलता है ?प्रेम करना ग़लत कैसे हो सकता है ?ग़लत तो किसी से नफ़रत करना होता है । लेकिन इसका जवाब ये ही है कि जब -जब इंसान ने अपनी मर्यादा या सीमा का उल्लंघन किया है उसे दंड मिला है । अत: प्रेम में यदि रिश्तों के अनुसार पवित्रता और मर्यादा का निर्वहन हो तो प्रेम कभी भी ग़लत नहीं हो सकता । सभी से प्रेम करें मग़र वैचारिक शुद्धता और मर्यादा में रहकर । किसी पुरुष का स्त्री से और स्त्री का पुरुष से प्रेम करना ग़लत तब तक  है जब तक की उसमे पवित्रता व मर्यादा नहीं है अन्यथा प्रेम कभी ग़लत नहीं होता। यदि कोई पुरुष एक  स्त्री से या एक स्त्री एक पुरुष से प्रेम करते हैं लेकिन उनके भाव शुद्ध व मर्यादित नहीं हैं तो ऐसे स्त्री -पुरुष को चरित्रहीन की...
'स्वच्छता' एक सभ्य और उन्नत समाज या  राष्ट्र की  ज़रूरत और ज़िम्मेदारी दोनों ही है । जी हाँ  किसी भी देश की प्रगति में सफ़ाई की  बहुत बड़ी भूमिका होती है क्योंकि स्वच्छता इंसान की मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करती है | स्वच्छ जगह से हमारी मानसिकता भी सकारात्मक होती है और एक ऊर्जा का संचार होता है । स्वच्छता हमे मानसिक व शारीरिक तौर से स्वस्थ बनाती है । जरा सोचिए कि आप जहाँ काम करते हैं वहाँ कचरे का ढेर पड़ा हुआ है ,आपको अजीबोग़रीब बदबुएं आ रही हैं तो न तो आप काम कर पाएंगे और न ही उस माहौल में स्वस्थ रह पाएंगे अत: अपने आस-पास का वातावरण स्वच्छ बनाए रखना हमारी एक प्रमु ख ज़िम्मेदारी बनती  है । बहुत बुरा लगता है जब किसी सड़क के किनारे ,या किसी भी गली से निकलते वक्त कचरे के ढेर का सामना होता है । क्यों हम अपने व अपने समाज की स्वच्छता से कोई सरोकार नहीं रखते आख़िर में इस लापरवाही का दुष्परिणाम तो बीमारियों के रूप में हमे ही भुगतना होता है । हम क्यों नहीं जागरूक होते पहले से ही । विदेशों में सफ़ाई व्यवस्था की तारीफ़ तो हम दिल खोल के करते हैं प...
''कभी दर्द बनके चुभता है, कभी आँसू बनके बहता है  वो मेरे हर ख़याल में अहसास बनके रहता है ।