संदेश

मातृ -भाषा

भारत -माँ की बेटी 'हिंदी' पाती  दर -दर ठोकर नाज़ों से पलती अंग्रेजी ग़ैर की बेटी होकर आकर्षण में बाँधा ऐसे, निज -भाषा का गौरव हीन  किया समृद्ध ,समर्थ' हिंदी 'का पद पल में इसने छीन  लिया मातृ -भाषा अपनाने में  ना, शर्म देश के लाल करो दो वैभव इस भाषा को तुम गर्व  से अपने भाल धरो । भावों की अभिव्यक्ति में' हिंदी' शक्तिशाली भाषा है राज करे हिंदी सदियों तक मन में यही अभिलाषा है भाषायें सभी  यूँ तो सम्मान की अधिकारी हैं लेकिन स्व देश में इसकी सर्व -प्रथम बारी है । -अंशु चौहान (  हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में- 2015, मेरी डायरी से )

बाल-बाल बचे

जान हथेली पर लेकर, हम नहाने निकले थे  कैसे बताएँ कितनी बुरी तरह ,हम फिसले थे । बच गई हैं हड्डियाँ साबुत, ये खुदा  की रहमत है ''ख़तरों के खिलाड़ी'' प्लेटफार्म से ,यूं तो गुज़रे थे । कुछ इधर-उधर हुई हड्डियों की, मरम्मत अभी बाक़ी है जब गिरे तो जैसे ,दिन में तारे निकले थे । किस कमबख़्त ने, कोसा न जाने फ़िल्मी गानों के, रियाज़ पर निकले थे। बदल के चैनल भक्ति-गीत में बस प्रभु कृपा से जीवित निकले थे ।। 

'ऊटी यात्रा अनुभव '

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ऊटी   भारत देश में प्राकृतिक सौन्दर्य की कमी नहीं है । लगभग हर राज्य हरी -भरी वादियों ,फूलों की घाटियों ,पर्वतों  ,नदियों ,झरनों आदि से संपन्न है । बस एक बार घूमने निकल जाइए फिर लगेगा कि अभी बहुत कुछ देखना बाकी  है । ये देश कितना सुन्दर है । गर्व होता है यहाँ के प्राकृतिक वैभव पर । हर राज्य की अपनी विशेषता है । अपना खान -पान है । इस बार हमने दक्षिण भारत के 'ऊटी 'को भ्रमण के लिए चुना । कोयंबटूर के उत्तर में  ८० किलोमीटर दूरी पर स्थित है ये सुन्दर क़स्बा । प्राकृतिक छटाओं से घिरा हुआ अति सुन्दर  व साफ़ -सुथरा  है । चारों -तरफ़ नीलगिरी की पहाड़ियां हैं ।तमाम  झीलें ,झरने और घाटियाँ हैं ।अधिकतर हिंदी फिल्मों की शूटिंग यहीं पर हुई है जैसे -'हम आपके हैं कौन ','दीवाना  ', दिल से ,कुछ -कुछ होता है और साजन आदि के गानों को यहीं फिल्माया गया है।  यहाँ पर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती जी के मोनार्क ग्रुप ऑफ़ होटल्स भी हैं ।इन सबके साथ ही सबसे अच्छी बात ये है कि यहाँ के लोग सफ़ाई के प्रति बड़े ही सजग हैं ...