बाल-बाल बचे

जान हथेली पर लेकर, हम नहाने निकले थे
 कैसे बताएँ कितनी बुरी तरह ,हम फिसले थे ।
बच गई हैं हड्डियाँ साबुत, ये खुदा  की रहमत है
''ख़तरों के खिलाड़ी'' प्लेटफार्म से ,यूं तो गुज़रे थे ।
कुछ इधर-उधर हुई हड्डियों की, मरम्मत अभी बाक़ी है
जब गिरे तो जैसे ,दिन में तारे निकले थे ।
किस कमबख़्त ने, कोसा न जाने
फ़िल्मी गानों के, रियाज़ पर निकले थे।
बदल के चैनल भक्ति-गीत में
बस प्रभु कृपा से जीवित निकले थे ।। 

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