'ऊटी यात्रा अनुभव '




ऊटी  






भारत देश में प्राकृतिक सौन्दर्य की कमी नहीं है । लगभग हर राज्य हरी -भरी वादियों ,फूलों की घाटियों ,पर्वतों  ,नदियों ,झरनों आदि से संपन्न है । बस एक बार घूमने निकल जाइए फिर लगेगा कि अभी बहुत कुछ देखना बाकी  है । ये देश कितना सुन्दर है । गर्व होता है यहाँ के प्राकृतिक वैभव पर । हर राज्य की अपनी विशेषता है । अपना खान -पान है । इस बार हमने दक्षिण भारत के 'ऊटी 'को भ्रमण के लिए चुना । कोयंबटूर के उत्तर में  ८० किलोमीटर दूरी पर स्थित है ये सुन्दर क़स्बा । प्राकृतिक छटाओं से घिरा हुआ अति सुन्दर  व साफ़ -सुथरा  है । चारों -तरफ़ नीलगिरी की पहाड़ियां हैं ।तमाम  झीलें ,झरने और घाटियाँ हैं ।अधिकतर हिंदी फिल्मों की शूटिंग यहीं पर हुई है जैसे -'हम आपके हैं कौन ','दीवाना  ', दिल से ,कुछ -कुछ होता है और साजन आदि के गानों को यहीं फिल्माया गया है।  यहाँ पर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती जी के मोनार्क ग्रुप ऑफ़ होटल्स भी हैं ।इन सबके साथ ही सबसे अच्छी बात ये है कि यहाँ के लोग सफ़ाई के प्रति बड़े ही सजग हैं । सड़क पर थोड़ी -थोड़ी दूरी पर ही कचरा -पात्र रखे हुए हैं । यहाँ के दुकानदार यहाँ आने वाले पर्यटकों से कचरे को कचरा-पात्र  में ही डालने का  विनम्र अनुरोध करते नज़र आते हैं । रास्ते में कोई भी व्यक्ति गाड़ी से बाहर, या चलते हुए सड़क पर कचरा नहीं फेंक सकता । यहाँ देखने के लिए बहुत कुछ है । यहाँ घने -घने जंगल हैं जिनमे हाथी व अन्य जानवर घूमते हुए दिख जाते हैं । जयपुर से' ऊटी' के लिए हमने 'बाय एयर' सफ़र किया । हम पहले मुम्बई पहुंचे फिर वहाँ से कोयम्बटूर । वैसे  तो कोयम्बटूर के लिए जयपुर से डायरेक्ट फ्लाइट भी है लेकिन कुछ टाइम- शेड्यूल संबंधी समस्याओं की वजह से हमने इस विकल्प को चुना । पूरी यात्रा 'मेक माय ट्रिप 'के द्वारा व्यवस्थित की गई थी । अत: एयर -पोर्ट पर पहुँचते ही एक टैक्सी हमारे लिए पहले से ही खड़ी  हुई थी । परंतु अजनबी शहर ,अंजानी भाषा का डर कुछ असहज बना रहा था ।
 फिर सोचा कि  तमिल न सही अंग्रेजी तो समझ आती ही है । अब शुरू हुआ  ड्राइवर महोदय के साथ अंग्रेजी से  जूझने का सिलसिला । ख़ैर धीरे -धीरे हम भी  सहज हो गए और वो भी हमारे साथ घुल-मिल गया । वह बहुत ही विनम्र ,हंसमुख और शांत स्वभाव का व्यक्ति था इसलिए हमारा डर खत्म हो गया था।  उसने हमे पूरा सहयोग दिया और सभी  स्थानों का भ्रमण बड़े ही धैर्य के साथ करवाया । हमने वहाँ ऊटी लेक ,दोड्डाबेट्टा पीक ,बॉट्निकल गार्डन ,रोज़ गार्डन ,पायकारा फॉल्स ,एवालांचे लेक ,शूटिंग पॉइंट,केट्टी वेळी, टी -फैक्ट्री, एल्के हिल्स आदि मनोरम जगहें देखी । इस सबके बाद हम कुन्नूर में डॉल्फिन नोज ,थंडरबर्ड ,जुरासिक गार्डन और माउंटेन रेलवे देखकर' 'कोडई- कनाल ''के लिए निकल गए । यहाँ से निकलते हुए हमे रात हो गई थी और आगे का रास्ता  और भी ज़्यादा  चढ़ाई  वाला और ख़तरनाक था  । हम आगे बढ़ते जा रहे थे और साथ-साथ डर भी बढ़ता जा रहा था । सड़क के दोनों  तरफ़  खाई ,रात का सन्नाटा और हमारी अकेली कार, एक अजीब सा उत्साह मिश्रित भय था दिल में । अचानक हमारी कार के आगे घना कोहरा छा  गया । ड्राइवर कुछ भी नहीं देख पा रहा  था । हम तीनों ही घबरा गए थे । हमारी धड़कनें बढ़ चुकी थीं । लेकिन मैं कुछ ज़्यादा ही डरी हुई  थी। इसलिए मैंने अपनी देवी माँ को याद करना शुरू किया और पूरी दुर्गा -चालीसा पढ़ डाली ।मैं हर यात्रा में दुर्गा -चालीसा ज़रूर ले जाती हूँ फिर चाहे वो देश यात्रा हो या विदेश । अब ड्राइवर ने धीरे-धीरे कार को आगे बढ़ाना शुरू किया ,तभी माँ की कृपा से हमे सामने कुछ रौशनी सी दिखाई दी । ये एक रेस्टोरेंट था।  हमने चैन की साँस ली ।  चाय -पानी आदि  पिया ,कुछ देर रुके फिर फॉग के हटने पर हम आगे बढ़े । १०.४५ बजे हम होटल पहुंचे ।अगले  दिन हमने कोड़ई -कनाल लेक ,शूटिंग पॉइंट व वहाँ पर मेरिनो भेड़ ,व ख़रगोश की कई प्रजाति देखीं । शूटिंग पॉइंट  वाली जगह जब हम पहुँचे तो वहाँ पर पहले से ही किसी सीरियल की शूटिंग चल रही थी । पूरी टीम वहाँ मौजूद दी । ड्रोन कैमरा लगा हुआ था । सच -मुच बड़ी ही खूबसूरत जगह थी । कुछ लोगों ने शायद हमें उसी टीम का हिस्सा समझ लिया था । इसलिए उधर से गुजरने वाले ये  लोग हमारे पास आये ,हमारा नाम पूछा और हमारे साथ फ़ोटो लेने की इच्छा भी ज़ाहिर की ।ये लोग हमसे बहुत प्रभावित हुए । हमारी तारीफ़ की और जाते वक़्त हमे 'मिस यू ऑल कह कर गए । वो लोग हमें तब तक मुड़ -मुड़ कर देखते रहे जब तक उनकी बस नहीं आ गई ।
कुल मिलाकर यहाँ की यात्रा का अनुभव गज़ब था ।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो

भीतर की सुन्दर दुनिया में रहें'