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शेर व कोट्स( swarachit) .

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   रूह तक बात को हर कोई लेने लगा है अब शायर हर कोई होने लगा है . -अंशु चौहान प्रेम जितना मर्यादित और शालीन होता  है,  उतना ही अधिक आकर्षक और श्रेष्ठ दिखता  है . -अंशु चौहान- कुछ लोग इस तरहा जिए कि खुद के लिए औरों को बलि चढ़ा गए,और कुछ इस तरहा जिए कि   के लिए,खुद की  साँसे  गवां  गए .-अंशु चौहान

'माँ जगदम्बा '

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पावन  रुप ,शीतल  छवि,हे करुणामयी !मैं तुम से मोहित  हूँ उन्नत- चरित्र  ,गरिमामयी ,मनमोहनी !मैं तुमसे मोहित हूँ  . पतित - तारिणी  ,क्षमादायिनी ,जीवन -सुधा ! मै तुम से मोहित हूँ निश्छल -मना,ओजस -प्रभा ,उज्ज्वल मुखी ,सुरागिनी ! मै तुमसे मोहित हूँ दुख -पीर  घटा ,सुख -नीर  बढ़ा ,हे सुख -प्रदायिनी, मै तुमसे मोहित हूँ . पाप -विनाशक ,शत्रु  -नाशक ,जीवन  संजीवनी,  मै  तुमसे मोहित हूँ . विषय -वासना मे हम बंधक ,हे  मुक्ति प्रदायिनी,मै  तुमसे मोहित  हूँ . -अंशु  चौहान

'माता के संस्कार'

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हे माताओं, देश के लिए ,हम सब के लिए ,शहीद होने  वाले ,बिना किसी रिश्ते  के  हमारे प्राणों के लिए अपना  सीना  छलनी करवा लेने वाले, उन तमाम सैनिकों पर रहम खाओ !मत  पथ -भ्रष्ट  होने  दो  अपनी  संतानों  को ,मत आशा  रखो उनसे किसी भी अनुचित तरीके से बस  अमीर  बन  जाने  की, मत  लालसा  पैदा  करो  उनमे किसी  का  भी  अहित  करके ,किसी  को  भी  दुख  पहुँचाकर स्वं  के  लिए  सुख ,सुविधाएँ  अर्जित  करने  की .उन्हे शिक्षित  करो  कि  तुम्हे  कुछ  भी  अर्जित  करना  है  तो  अपनी  मेहनत  से ,अपनी योग्यता  से . उन्हे  समझाओ  कि गरीबी  कोई  आनुवांशिक बीमारी  नही  है .तुम  परिश्रम ,ईमानदारी और अपने  कर्म  मे  गहरी  निष्ठा  रखकर  इससे  मुक्ति  पा  सकते  हो .अनुचित  तरीके  से  धन ...