संदेश

भावावेश घातक है ..

चित्र
भावावेश में लिए गए निर्णय बहुत घातक  सिद्ध  होते  हैँ .भावावेश  तो विपरीत परिस्थितियों से उत्पन्न क्षणिक ही  होता  है और  कुछ  समय  बाद  सामान्य हो जाता है  परंतु उस समय  विशेष  में  लिया गया  ग़लत निर्णय पूरी  ज़िन्दगी बर्बाद कर देता है .इसलिए  कभी  भी , किसी परस्थिति में आवेश  में आकर  निर्णय न  लें . विश्वास  रखिए जिस तरह अनुकूल  समय  हरवक्त  नहीं  रहता ,उसी तरहा प्रतिकूल  समय  भी  हरवक्त  नहीं  रहेगा .ज़िन्दगी  को  आशान्वित होकर जिए .समय भी  अनुकूल  हो  जाएगा .खुद  को टूटने  ना  दें ,बिखरने  ना  दें.यही ज़िन्दगी  को  जीने  का  सही  नज़रिया है . 

इंसान का बॉस (मस्तिष्क )

चित्र
हर इंसान का एक ऐसा बॉस(मस्तिष्क ) होता है जिसके आदेशों की अवहेलना वो किसी भी कीमत पर  नहीं कर  पाता  है .सुबह  से  शाम  तक हर वक्त उसे, उसके ही आदेशों  के  हिसाब  से  बर्ताव करना पड़ता है .ये  कहता है  बैठ  जा  तो  बैठ जाता है  ,खड़ा  हो तो  ...इसके आदेशों  की  पालना  करने  में  ही  हमारी  भलाई  है  मगर सही  आदेशों  की  ही ,और  इसका  निर्धारण  करेगा  विवेक  जो  इसी  से  उत्पन्न  है .इसलिए मस्तिष्क  को  स्वस्थ  रखें  और  सही  दिशा निर्देशन  प्राप्त  करते  रहे .सोच  सही  तो  निर्णय  और  जीवन सही .

'दुविधा' .

चित्र
बड़ी  दुविधा सी रहती है हर वक्त ,ये निर्णय नहीं ले पाती कि सांसारिक जीवन  की  सफलता को  उद्देश्य  रखूँ  या आध्यत्मिक .सुनती और पढ़ती तो  यही  आई  हूँ  अक्सर  कि  मनुष्य जन्म बड़ी  मुश्किल  से  मिलता  है,इसे ईश्वर प्राप्ति में लगाना  चाहिए . किसी से मोह  नहीं रखना  चाहिए .लेकिन सांसारिकता के  लिए  मोह  मुझे  लगता है थोड़ा तो  ज़रूरी है .किसी  भी क्षेत्र में सफल होने के लिए उसके प्रति मोह की  ज़रूरत तो  रहेगी ही .मोह के  वशिभूत  होकर  ही हर  व्यक्ति  रिश्ते निभा रहा है .हर  कर्म कर  रहा है.जिस दिन निर्लिप्त भाव  से  कोई ये  कर्म और दायित्व निभाएगा उसी  दिन  से वह योगी और आध्यत्मिक कहलाएगा  .सफलता ,नाम,शोहरत  इन सब  चीजों के प्रति मोह ,ये ही तो सांसारिकता के लक्षण हैँ .इंसान जब  हर  तरह का  मोह ,इच्छाएँ त्याग  देता  है  तभी अध्यात्म से और  ईश्वर  स...