इंसान का बॉस (मस्तिष्क )
हर इंसान का एक ऐसा बॉस(मस्तिष्क ) होता है
जिसके आदेशों की अवहेलना वो किसी भी कीमत पर नहीं कर पाता है .सुबह से शाम तक हर वक्त उसे, उसके ही आदेशों के हिसाब से बर्ताव करना पड़ता है .ये कहता है बैठ जा तो बैठ जाता है ,खड़ा हो तो ...इसके आदेशों की पालना करने में ही हमारी भलाई है मगर सही आदेशों की ही ,और इसका निर्धारण करेगा विवेक जो इसी से उत्पन्न है .इसलिए मस्तिष्क को स्वस्थ रखें और सही दिशा निर्देशन प्राप्त करते रहे .सोच सही तो निर्णय और जीवन सही .

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