मै भी खड़ी हूँ झूठ के प्रतिरोध में लेकिन चयन शब्दों का मर्यादा में मै बेहतर समझती हूँ |
छोड़ दूँ बंदगी ,भूलकर शिष्टता त्यागकर अपनी आन और शान -बान को
इस क़दर बेअदब होना मै बद्द्तर समझती हूँ |
चयन शब्दों का मर्यादा में मै बेहतर समझती हूँ |
भरी आक्रोश में हूँ ख़ूब ,मन दहकती ज्वाला है ,तहज़ीबों की सीमा ने इस दिल को सँभाला है |
छोड़कर संस्कृति और संस्कार को ,त्यागना इस तरहा सद्व्यवहार को ,
सभ्यता और दिलों पर मै ये नश्तर समझती हूँ |
चयन शब्दों का मर्यादा में मै बेहतर समझती हूँ |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
allowed