'ये फ़र्क क्योँ रहमत में '

जी हाँ !जानवरों की जान की भी अलग-अलग क़ीमत होती है
किसी को मारने से रोजग़ार चलता है तोकिसी को मारने की सज़ा जेल होती है |
'जीव' यूँ तो सभी में एक ही होता है लेकिन
सब पर इंसान की रहमत अलग होती है |
कुछ के दर्द और आँसुओं की कोई औक़ात नहीं होती
जबकि किसी की 'आह'(दर्द ) पर दुनिया सुबकती है |
कुछ बिखर जाते हैं रस्ते में टुकड़े -टुकड़े होकर
और रह से गुज़र रहे शख़्स के शिकन तक नहीं होती
वहीँ कुछ पहुँचा देते हैं सलाख़ों के पीछे और
आसानी से ज़मानत तक नहीं होती |
ये अंतर न जाने क्यूँ है यहाँ, जबकि प्रभु की अदालत
ऐसे भेदभाव से कभी सहमत नहीं होती |
क्या कुछ फ़र्क है शेर ,चीते ,हिरण और मुर्गे ,बकरे के प्राणों में
हर जीव का जीवन ज़रूरी है ,सबकी जान का महत्व सम होना चाहिए |
कुछ भी हो ,कैसे भी हो बस जीव हत्या रुकनी चाहिए |
Uttam vichar
जवाब देंहटाएंBahut shukriya
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