'जागृत हुआ मन'






ज़मीं से फ़लक  तक एक उड़ान बाक़ी है

उल्टे हरफ़ की सीधी पहचान बाक़ी है|

मुझमे सोई सी एक अंजान शक्ति को जगाने

बुलंद सी  कोई एक आवाज़ बाक़ी है|

अब जागूँगी ,नहीं खोऊंगी सपनों में

इन निराधार ,निरंकुश स्वप्नों को डराने

हक़ीक़त का एक  अंकुश बाक़ी है|

बहुत हुई आराम के बिछौने पर चैन की साँसें

अब श्रम से उपजी थकान पाना बाक़ी है|

लो तुम भी बढ़ाओ अब हौसला कुछ मेरा

इस सफ़र में तुमसे भी कुछ उम्मीद बाक़ी है ||




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