'वास्त्विक सुरक्षा तो उसकी तरफ़ से'
मुझे तो लगता है कि भविष्य की इस क़दर चिंता ने इंसान को इतना नेगेटिव बना दिया है कि हर वक़्त वह एक अनजाना सा भय लेकर बस किसी भी तरह भविष्य को सुरक्षित बनाने की ही सोचता रहता है | इस इंतज़ाम में वह अपने अमूल्य वर्तमान की इतनी ज़्यादा उपेक्षा कर रहा है कि भविष्य की सुरक्षा ही ख़तरे में पड़ती जा रही है | इतना भय रखकर हम अपने वर्तमान और भविष्य दोनों को ही जीने लायक स्थिति में नहीं बचेंगे |जब वर्तमान पहले है तो इसे फ्यूचर के लिए क्यों कुर्बान कर दें और वैसे भी फ्यूचर किसने देखा है।
ज़िंदगी का तो किसी की भी और कभी भी कुछ भरोसा नहीं है। माना के फ्यूचर की चिंता एक प्रैक्टिकल और अच्छी सोच है लेकिन जीवन और ईश्वर के प्रति इतना अविश्वास भी तो अच्छा नहीं है। सबसे बड़ी और सुरक्षित पॉलिसी तो उसकी तरफ़ से होती है। उसकी पॉलिसी और सत्ता में जिस दिन गहन आस्था हो जाएगी वर्तमान और भविष्य दोनों सुरक्षित हो जाएँगे वशर्ते आस्था उच्च कोटि की होनी चाहिए। जानती हूँ मेरी बातें आप सभी को कोरा दर्शन और इम्प्रैक्टिकल लग रही होंगी मगर सच तो ये ही है कि कुछ चिंताए हमें ईश्वर पर छोड़ देनी चाहिए। वो सब सँभाल लेगा अगर तुम उस काबिल हो तो ,अन्यथा पॉलिसीज़ भी कहाँ काम .... . |
एक तऱफ तो जीवन के प्रति सकारात्मक नज़रिया रखने की बात कही जाती है वहीं दूसरी तरफ़ पॉलिसी धारक के सामने जीवन के सभी नकारात्मक पहलू रखकर उसका माइंड इस तरह तैयार कर दिया जाता है कि ज़िंदगी के प्रति उसकी पॉज़िटिव सोच एकदम नकारात्मक हो जाती है और फिर शुरू हो जाता है भविष्य के प्रति उसके मन में एक अनजाना सा भय। उस भय से मुक्ति पाने के लिए वो दुनिया भर की पॉलिसी ,ले डालता है और झोंक देता है ख़ुद को उनकी ई एम आई भरने में। मतलब ये कि भविष्य की तो कुछ ख़बर है ही नहीं वर्तमान भी भविष्य के नाम पर कुर्बान .. |सुरक्षित सोच के साथ तो जीना चाहिए लेकिन इतना डर - डर कर नहीं बीमा पॉलिसीज़ के ख़िलाफ़ मै नहीं हूँ मगर जीवन और ईश्वर के प्रति इतना नकारात्मक रवैया भी तो सही नहीं है।

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