नारी हूँ मैं अबला नहीं( kavita)

 




चट्टानों से लिए हौसले, हर ग़म  से टकराऊँगी

हूँ नारी पर कमज़ोर नहीं,हर विपदा को हराऊँगी  

मुझमें विलय है साहस,शक्ति ,योद्धा जिसकी करते भक्ति,

उदीयमान सूरज सी होकर अम्बर तक छा जाऊँगी .

पतित -आचरण,दम्भी जन को शील-विनय सिखलाऊँगी .

प्रेम , समर्पण दया भाव से जीवन को महकाऊँगी 

स्वं से स्व का भाव भुलाकर परहित को मिट जाऊँगी.

नव सृष्टि की बन सहयोगिनी नव सृजन मार्ग दिखलाऊँगी .

नारी हूँ मैं अबला नहीं ये सबको बतलाऊँगी .

-Anshu Chauhan

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