'तुम्हे मुबारक'(Hindi poem)
मै पवित्र हूँ,अशुद्धता तुम्हें मुबारक़
मैं उन्मुक्त हूँ,बंधन तुम्हें मुबारक़
मैं मौन हूँ,शोर तुम्हें मुबारक़
मै प्रीत हूँ,बैर तुम्हें मुबारक़
मै मृदु हूँ,कटुता तुम्हें मुबारक़
मैं क्षमा हूँ प्रतिशोध तुम्हें मुबारक़ ||
मेरे इस इंद्रधुनषी रंगों वाले ब्लॉग में किसी 'विषय' विशेष को लेकर रचनाएँ नहीं लिखी गई हैं ,बल्कि मनुष्य के मन में उठने वाले हर भावों और समाज से जुड़ी हर घटनाओं ,हर समस्याओं ,उससे जुड़े खट्टे -मीठे अनुभवों को लेकर ही समस्त रचनायें की गई हैं.जीवन के हर रंग,हर पहलू को अनुभव करने के लिए मेरे ब्लॉग से जुड़े रहें |मेरे यू ट्यूब चैनल "मेरी रचना मेरे स्वर" पर आप मेरी इन रचनाओं को सुन भी सकते हैं।🙏😊https://youtube.com/@merirachnamereswar?si=W8t48Lg7XFiNAh5B
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