मनुष्य जन्म का उद्देश्य

 



एक बात समझ नही आती कि  जब मनुष्य जन्म  का उद्देश्य अच्छे कर्म करके  ईश्वर  प्राप्ति करना

ही है तो हम ऐसी चीजों को क्यों प्रमोट कर रहे हैं,ऐसी चीजों में क्यों खुशी ढूंढ रहे हैं जो ईश्वर से दूर ले जा रही हैं .

क्लब पार्टी ,दारू पार्टी,डांस बार इन सब की क्यों ज़रूरत है ?क्यों जगह-जगह पवित्र कीर्तन ,भजन और यज्ञ का वातावरण नहीं बना देते ताकि सबकी अशुद्ध बुद्धि शुद्ध हो सके।क्यों स्कूल, कॉलेज में गुरुकुल जैसा माहौल नहीं बना देते? क्यों नैतिक  और आध्यात्मिक उन्नति पर ज़्यादा ज़ोर नही देते?

संस्कृति, सभ्यता को नाश करने वाली चीजें भी परोसेंगे फिर अपराध बढ़ेंगे तो कहेंगे कि कलयुग आ गया, लोग बिगड गए.बिल्कुल वैसा ही जैसे कोई खुद ही नदी में डूब जाए और फिर चिल्लाकर कहे कि मुझे बचा लो.है ना कोरी मूर्खता?

पहले मानवीयता बचाये तभी मानव सभ्यता बचेगी.हम खुद ही अपराधी तैयार कर रहे हैं फिर उन्हीं से परेशान हो रहे हैं और हम अपराध को मिटाने की इच्छा भी कर रहे हैं।कलयुग भी हम अपने कर्मों से बनाते हैं और सतयुग भी.

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