"कुछ तो मतलब रखती हैं"(कविता)
मै कुछ बोलूँ पर तेरी खामोशी, कुछ तो मतलब रखती हैं.
मेरे साथ में तेरी य़ादें ,कुछ तो मतलब रखती हैं.
पास रहुँ तो यहाँ- वहाँ पर नजरें,दूरी में मेरी ही बातें कुछ तो मतलब रखती हैं.
बुझा-बुझा सा हाल हैं दिल का ,गरम तवे पर जली सी रोटी कुछ तो मतलब रखती है.
मेरे पास में घंटों रुकना ,गैरों संग चन्द लमहे सिरकत कुछ तो मतलब रखती है.
देख के मुझ से मुँह यूँ छुपाना,नज़र मिलाकर,नजर चुराना कुछ तो मतलब रखती है.
तन्हाई के दो पहलू हैं ,खुद ही खुद से बातें दिल की कुछ तो मतलब रखती हैं .
-अंशु चौहान

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