'तलाश'


 उसमें सुलगती हूँ मैं ,मुझमें बुझता है वो .

उसमे चलती हूँ मैं ,मुझमें थमता हैं वो 

उसमे संवरती हूँ मैं,मुझमे बिखरता है वो 

उसमे पहेली हूँ मैं,मुझमे सुलझा है वो   

उसमे रोशनी हूँ मैं मुझमे अंधेरा हैं वो. 

उसमे तलाश हूँ मैं,मुझमे लापता है वो .

उसमे समन्दर हूँ मैं,मुझमे प्यासा हैं वो .    

उसमें आशा हूँ मैं, मुझमें निराशा है वो

उसमें ठहरी हूँ मैं मुझमें बीता है वो.       

-अंशु चौहान   


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