'ना होती है तुमसे ..(स्वरचित गीत) )


 (स्वरचित गीत )

ना होती है तुमसे मुलाकात तो ,दिल को आराम नहीं मिलता 

हर पल ये ढूंढे नज़र बस तुझे,तेरा पता ही  नहीं  मिलता 

1.मुझे तू संभाले ,तुझे मैं सँभालू  

तेरे दिल में अपनी जगह मैं बना लूँ 

बस जाए मेरी  धड़कनों में जो, ऐसा आगाज़ नहीं  मिलता.

ना होती है.   .    . .    

2. तसव्वुर  में मेरे  दिन - रात होकर 

यादों में मेरी आँखें  भिगोकर

चुरा ले जो मुझसे ,मेरी धड़कनों को ,ऐसा आराम  नहीं मिलता .

-अंशु चौहान     

               

   

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