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'निम्न से ही उच्च है "

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रुतवा और प्रतिष्ठा का अर्थ कभी भी व्यक्तिगत या सीमित मायनो में नहीं लिया जा सकता । ये व्यक्तिगत या एकात्मक तौर पर अर्थहीन हैं । इन्हें अपना अस्तित्व पाने के लिए पराश्रित होना पड़ता है । इस वाक्य का अर्थ ये है कि इंसान प्रसिद्ध होने के लिए, सम्मान पाने के लिए  किसी दूसरे व्यक्ति या समूह विशेष पर निर्भर करता है ।  इंसान अपने आप में कितना ही गुणी या प्रतिभावान क्यों न हो जब तक उसकी प्रतिभा की कद्र करने वाले ,उसके गुणों को पहचानने वाले या स्वीकार करने वाले लोग नहीं होंगे वह व्यक्ति प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर पाएगा । इसलिए इस सम्मान को पाने के लिए हमें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के  साथ-साथ दूसरों को प्रभावित करना ,उनके विचारों को समझना और उनकी प्रतिक्रियाओं को सकारात्मक आधार भी प्रदान करना होता है ।  हर  इंसान अपना रुतवा पाने के लिए ,अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए, उसे सिद्ध करने के लिए दूसरों पर निर्भर है । ये दूसरे की सोच है , उसका  अपना निर्णय है कि वह आपको प्रतिभावान मानता है या नहीं । वो आपमें सब कुछ होते हुए भी आपका सम्मान करता है या नहीं । यदि आपकी प्रतिभा...

लो आने वाली है गर्मी

लो आने वाली है गर्मी । सितम सर्दी के अब कम होंगे  लदे ये कपड़े अब कम होंगे  आइस- क्रीम ,कुल्फ़ी के ठेले  अब सड़कों पर हर दम  होंगे ।  लेकिन गर्मी भी क्या सयानी  याद दिला देगी वो नानी  लू के थपेड़े ,धूल वो आँधी दुपहरी पड़ जाएगी भारी सड़कों पर सन्नाटा होगा मुश्किल बाहर जाना होगा होगी धूप ये क़ातिल तब तो जो लगती थी बड़ी सुहानी   रात बनेगी भीगी बिल्ली  दिन की ही होगी मनमानी । 

जन्म -दिन पर मोमबत्ती जलाकर उसे बुझाना सही नहीं

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जन्म -दिन पर केक काटते वक़्त मोमबत्ती जलाकर उसे बुझाना मुझे  बिल्कुल  अच्छा  नहीं लगता । अपनी भारतीय -धामिर्क संस्कृति में' दिए' को जलाकर बुझाना शुभ नहीं माना जाता है । इसलिए इस शुभ दिन पर दिए को जलाकर बुझाना नहीं चाहिए । मेरी दृष्टि में तो जैसे  ही कैंडल जलाई जाए तभी' हैप्पी बर्थ डे 'विश किया जाए । अब  उस कैंडल को दिए की तरह उपयोग में लेते हुए किसी उपयुक्त स्थान पर रौशनी के लिए रख दिया जाना चाहिए । ये मेरी व्यक्तिगत राय या सोच है । किसी की  विचारधारा की आलोचना मेरा उद्देश्य नहीं है । शुभता और अशुभता को मानते हो तो करें।