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क्या ये है नारी स्वतंत्रता

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  नारी स्वतंत्रता और अधिकारों की पक्षधर मै भी  रही हूँ।  मै मानती हूँ कि स्त्री को भी पहनने ,ओढ़ने  और शिक्षा आदि के क्षेत्र में पूरी छूट होनी चाहिए। उस पर अनावश्यक प्रतिबन्ध नहीं लगाने चाहिए लेकिन  कुछ नैतिक मर्यादाऒं  का निर्वहन तो उन्हें अवश्य ही करना चाहिए। साथ ही अपने परिवार वालों के विश्वास को बनाए रखना भी उनका एक आवश्यक दायित्व होना चाहिए । मै  देख रही हूँ कि बहुत सी जगह इस स्वतंत्रता का सही उपयोग नही हो रहा है। माँ-बाप से झूठ बोल कर क्लासेज बंक करना ,फिल्म देखने निकल जाना या पार्क में बैठ कर अपने पुरुष -मित्र के साथ अमर्यादित आचरण करना एकदम अशिष्ट और निंदनीय कृत्य हैं। स्त्री-पुरुष मित्रता ग़लत नहीं है। मगर इस मित्रता में मर्यादा और संस्कारों की अनदेखी निश्चित रूप से आलोचनीय है। दोनों का  ही आपसी व्यवहार  संयमित और गरिमामय होना चाहिए।  आज  की आधुनिक युवतियाँ स्वतंत्रता को सही अर्थ में नहीं ले रही हैं। अंग प्रदर्शन करने वाली पोशाक उन्हें इतना क्यों प्रभावित कर रही है ?कटी फटी जींस फ़ैशन का हिस्सा बता...

हास्य कल्पनायें

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आज मै ऊपर आसमां  नीचे, आज मै आगे जमाना है पीछे.. अरे..सँभलूँ   -कब से तार पे लटक रहा हूँ अब तो उतार लो भाई और कितना सुखाओगे ? -इसे कहते हैं वेट लिफ़्टिंग

नया सवेरा

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                                                      विस्मृत सी हो रही हैं  अतीत की यादें मेरे हिस्से में एक नया सवेरा है  ये जो गुमसुम सी लग रहीं हैं राहेँ नज़र तुमको                                                        इंतज़ार में उसी के निःशब्द हो रही हैं  वो रौशनी की किरण अब करीब ला रहा है  मिट रही है अतीत के अंधेरे की स्याही नई इबारत सी कोई लिखी जा रही है।