नया सवेरा





                                                     विस्मृत सी हो रही हैं अतीत की यादें
मेरे हिस्से में एक नया सवेरा है 
ये जो गुमसुम सी लग रहीं हैं राहेँ नज़र तुमको 
                                                      इंतज़ार में उसी के निःशब्द हो रही हैं 
वो रौशनी की किरण अब करीब ला रहा है 
मिट रही है अतीत के अंधेरे की स्याही
नई इबारत सी कोई लिखी जा रही है।







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