क्या ये है नारी स्वतंत्रता



 
नारी स्वतंत्रता और अधिकारों की पक्षधर मै भी  रही हूँ।  मै मानती हूँ कि स्त्री को भी पहनने ,ओढ़ने  और शिक्षा आदि के क्षेत्र में पूरी छूट होनी चाहिए। उस पर अनावश्यक प्रतिबन्ध नहीं लगाने चाहिए लेकिन  कुछ नैतिक मर्यादाऒं  का निर्वहन तो उन्हें अवश्य ही करना चाहिए। साथ ही अपने परिवार वालों के विश्वास को बनाए रखना भी उनका एक आवश्यक दायित्व होना चाहिए ।

मै  देख रही हूँ कि बहुत सी जगह इस स्वतंत्रता का सही उपयोग नही हो रहा है। माँ-बाप से झूठ बोल कर क्लासेज बंक करना ,फिल्म देखने निकल जाना या पार्क में बैठ कर अपने पुरुष -मित्र के साथ अमर्यादित आचरण करना एकदम अशिष्ट और निंदनीय कृत्य हैं। स्त्री-पुरुष मित्रता ग़लत नहीं है। मगर इस मित्रता में मर्यादा और संस्कारों की अनदेखी निश्चित रूप से आलोचनीय है। दोनों का  ही आपसी व्यवहार  संयमित और गरिमामय होना चाहिए।

 आज  की आधुनिक युवतियाँ स्वतंत्रता को सही अर्थ में नहीं ले रही हैं। अंग प्रदर्शन करने वाली पोशाक उन्हें इतना क्यों प्रभावित कर रही है ?कटी फटी जींस फ़ैशन का हिस्सा बताकर पहनना इसके पीछे आख़िर  क्या मानसिकता है?एक अच्छी कंडीशन वाली साबुत जींस को कैंची से काटकर उसे फ़ैशन क़रार  दे दिया  जाता है। जबकि कोई कपड़ा स्वत: फट जाए तो उसकी सिलाई, रफ़ू आदि की जाती है। ये कैसी मानसिकता है?
स्त्री स्वतंत्रता उसकी उन्नति के लिए ज़रूरी है उसे उद्दंड बनाने के लिए नहीं।

पहनने-ओढ़ने  में जितनी स्वतंत्रता का उपयोग स्त्री ने किया है उतनी  तो पुरुषों  को भी नहीं मिली। सही माने तो दुरूपयोग किया है। एक फिल्म में भी एक नायक पूरे कपड़ों में होता है तो नायिका को भरपूर छोटी पोशाक पहनाई जाती हैं। वैसे भी कहीं भी देख लीजिए युवा पूरे कपड़ों में दिखाई देंगे लेकिन युवतियाँ छोटे कपड़ों में ही अधिक दिखाई देंगी।  यहाँ ये कैसी असमानता है।युवतियाँ ही क्यों छोटे कपडों का चयन करती हैं।पोशाक कोई भी हो लेकिन उसमें  शरीर का अनावश्यक प्रदर्शन न हो।

 क्या इस स्वतंत्रता के बिना उनकी  शैक्षिक और अन्य उन्नति रुक जाएगी?नारी स्वतन्त्रता का अर्थ उसे छोटे या भद्दे कपड़े पहनने देना या पुरुष मित्रों के साथ कहीं भी या किसी भी समय घूमने देना है? सार्वजनिक स्थलों पर अमर्यादित व्यवहार करने  देना है। मै नहीं समझती कि ये चीज़े उसकी उन्नति में सहायक होंगी। मै चाहती हूँ कि स्त्री को सारे अधिकार मिलें लेकिन उन अधिकारों का सही दिशा में उपयोग किया जाए। ये स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही ज़रूरी व हितकर होगा।


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