हास्य कल्पनायें

आज मै ऊपर आसमां  नीचे, आज मै आगे जमाना है पीछे.. अरे..सँभलूँ


 -कब से तार पे लटक रहा हूँ अब तो उतार लो भाई और कितना सुखाओगे ?
-इसे कहते हैं वेट लिफ़्टिंग

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मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो

भीतर की सुन्दर दुनिया में रहें'