संदेश

चाँद ,बारिश ,और चाँदनी

चित्र
गर्मी से परेशान चाँद भी ,बाट जोह रहा बादल की  शीतलता  को तभी बढ़ाऊँ ,मेहर हो जब कुछ सावन की।  गौरी के सुन्दर मुखड़े को मेरी उपमा, देते  रहे हैं सभी कविगण  गढ़ न पाएँगे कोई कविता ,हुई जो सूरत काजल सी। कुछ बूंदों का करूँ आचमन,तन पर रख लूँ चादर ठंडे बादल की हो मतवाला खेलूँ लुकाछुपी ,ढूँढे चाँदनी मतवाली सी। मेरी चाँदनी में प्रेमी -गण ,गढ़ें कहानी ख़्वाबों की दो पल उनके साथ रहूँ फिर ,दूँ थोड़ी तन्हाई भी। अपनी चाँदनी को लेकर मै जाऊँ ,ले कुछ बूँदे बारिश की उसे भिगो दूँ ,कह भी दूँ ये ,तुम धुली -खिली सी रूपमती इस पागल की। -

फ़ोबिया

चित्र
हर इंसान ज़िंदगी में किसी न किसी भय से पीड़ित होता है। कितनी मुश्किल हो जाती है ज़िंदगी जब एक अज़ीब सा डर हर वक़्त इंसान के पीछे -पीछे चलता है। ये डर किसी भी तरह का हो सकता है। इस डर को दुर्भीति या (फ़ोबिया  )  कहा जाता है। सामान्य डर और फ़ोबिया  में ये अंतर होता है कि सामान्य डर को समझा कर या तर्क से  दूर किया जा सकता है जबकि फ़ोबिया  में इंसान का दिमाग़ किसी तर्क को ग्रहण करने की स्थिति में नहीं होता। फ़ोबिया में इंसान को किसी भी तरह का डर हो सकता है -जैसे मृत्यु का भय ,किसी के खो जाने का भय ,भीड़ का भय ,ऊँचाई का भय ,गहरे पानी का भय ,छोटी या बंद जगह का भय  , किसी विशेष जंतु से भय  आदि। ये सभी मानसिक विकार की श्रेणी में आते हैं। लेकिन शायद अधिकतर लोग  ही इन विकारों की चपेट में हैं।  फ़ोबिआ में व्यक्ति को विशेष क्रियाओं या वस्तुओं से भय लगने लगता है। व्यक्ति को उन काल्पनिक चीज़ों से भी भय पैदा होने लगता है जो होती ही नहीं हैं। या फिर ऐसी सामान्य सी परिस्थिति भी उसे असहज बना देती है जो दूसरों के लिए सामान्य होती है।...
चित्र
क़िस्मत अगर अच्छी हों तो किसी भी योनि में जीव सुख भोग सकता है। अन्यथा इंसान होकर भी कुछ सुख या सम्मान अर्जित नहीं कर सकता।  एक तरफ़ ग़रीबी की मार सहते, बीमारी से ग्रसित मनुष्य और दूसरी तरफ़  अपने मालिक की गाड़ियों में सैर-सपाटा करते ,मन -पसंद खाना खाने वाले वो कुत्ते। ये सब किस्मत का ही तो फ़र्क है। क़िस्मत अच्छी हो तो सड़क के आवारा कुत्ते भी  एक अपनत्व भरा नाम पाकर सम्मानित व स्थापित बन जाते हैं । जयपुर के इस  आवारा कुत्ते की क़िस्मत उन कई कंगाल ,बदहाल इंसानों से  बहुत ज़्यादा अच्छी थी जिन्हे सड़को पर ,रेल की पटरियों पर कोई भी गाड़ी कुचल कर चली जाती है। जो भूख से तड़प कर या किसी बीमारी से परेशान होकर अपने प्राण त्याग देते हैं। जिन्हे संभालने वाला या सहारा देने वाला कोई हाथ आगे नहीं बढ़ता।  फ़्रांस की रिसर्च स्कॉलर मरियम ने जयपुर के आवारा कुत्ते की किस्मत को कुछ इस तरह सँवारा कि दिमाग ये सोचने को मज़बूर हो जाता है  कि इंसान की योनि कुत्ते की योनि से श्रेष्ठ कैसे है? फ़्रांस की मरियम ने इस कुत्ते के ईलाज़ पर 7 लाख रूप...