फ़ोबिया
हर इंसान ज़िंदगी में किसी न किसी भय से पीड़ित होता है। कितनी मुश्किल हो जाती है ज़िंदगी जब एक अज़ीब सा डर हर वक़्त इंसान के पीछे -पीछे चलता है। ये डर किसी भी तरह का हो सकता है। इस डर को दुर्भीति या (फ़ोबिया ) कहा जाता है। सामान्य डर और फ़ोबिया में ये अंतर होता है कि सामान्य डर को समझा कर या तर्क से दूर किया जा सकता है जबकि फ़ोबिया में इंसान का दिमाग़ किसी तर्क को ग्रहण करने की स्थिति में नहीं होता।
फ़ोबिया में इंसान को किसी भी तरह का डर हो सकता है -जैसे मृत्यु का भय ,किसी के खो जाने का भय ,भीड़ का भय ,ऊँचाई का भय ,गहरे पानी का भय ,छोटी या बंद जगह का भय , किसी विशेष जंतु से भय आदि। ये सभी मानसिक विकार की श्रेणी में आते हैं। लेकिन शायद अधिकतर लोग ही इन विकारों की चपेट में हैं।
फ़ोबिआ में व्यक्ति को विशेष क्रियाओं या वस्तुओं से भय लगने लगता है। व्यक्ति को उन काल्पनिक चीज़ों से भी भय पैदा होने लगता है जो होती ही नहीं हैं। या फिर ऐसी सामान्य सी परिस्थिति भी उसे असहज बना देती है जो दूसरों के लिए सामान्य होती है।
इस( फ़ोबिया ) की स्थिति में व्यक्ति का दिल जोर -जोर से धड़कने लगता है। उसे बेहोशी भी आ सकती है.
इस विकार से ग्रसित अधिकतर व्यक्ति अपनी इस मन:स्थिति को छुपाने की कोशिश करते है। लेकिन छुपाने से स्थिति गंभीर हो सकती है। अत: इसको छुपाने की जगह इसका इलाज करवाना चाहिए। मनोवैज्ञानिक की सहायता ली जा सकती है या अपनी 'विल पॉवर ' और मेडिटेशन से इसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
फ़ोबिया कई तरह के होते हैं। तीन प्रमुख श्रेणियाँ हैं फ़ोबिया की-अगोरा फ़ोबिया ,सामाजिक फ़ोबिया ,विशिष्ट फ़ोबिया।
अगोरा फ़ोबिया -खुली जगह ,घर से बाहर ,सिनेमा हॉल ,भीड़-भाड़ आदि से लगने वाला डर।
अगोरा फ़ोबिया -खुली जगह ,घर से बाहर ,सिनेमा हॉल ,भीड़-भाड़ आदि से लगने वाला डर।
सामाजिक फ़ोबिया- इस फ़ोबिया में भीड़ में बोलने से डर ,स्टेज का डर ,टेलीफोन पर बात करने से डर ,ऊँचे पद वाले व्यक्ति से बात करने का डर आदि शामिल हैं।
विशिष्ट फ़ोबिया-(स्पेसिफ़िक फ़ोबिया )-इसमें किसी ख़ास चीज़ ,ऊँचाई ,पानी ,बिल्ली ,कुत्ते या कीड़े आदि का भय हो सकता है।
इन तीन फ़ोबियाज़ के अलावा भी कई फ़ोबिया हैं जिनसे ज़िंदगी में काफ़ी कठिनाई आ सकती है। जैसे -एक्रोफोबिया (ऊँचाई से डर ),क्लोस्ट्रोफ़ोबिया (बंद व छोटी जगह का भय ),नेक्रोफोबिया (मौत का डर ),दिल की बीमारी का डर (कार्डियो फ़ोबिया ) आदि हैं।
फ़ोबिया के कारण जेनेटिक भी हो सकते हैं और किसी परिस्थिति या घटना विशेष से उत्त्पन्न भी हो सकते हैं।
आत्म विश्वास की कमी और आलोचना भी इसका कारण हो सकते हैं।
फ़ोबिया अपनी विकट स्थिति में पहुँचे इससे पहले इसे कंट्रोल करने की जरुरत है। इसके लिए दवाइयाँ भी दी जाती हैं। परन्तु कोई भी दवाई अपने -आप ले न लें। मनोवैज्ञानिक सलाह ,अपनी इच्छा शक्ति ,मेडिटेशंन आदि के द्वारा इस विकार को दूर किया जा सकता है।

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