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'ये फ़र्क क्योँ रहमत में '

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जी हाँ !जानवरों की जान की भी अलग-अलग क़ीमत होती है किसी को मारने से रोजग़ार  चलता है तो किसी को  मारने की सज़ा जेल होती है | 'जीव' यूँ तो सभी में एक ही  होता है लेकिन सब पर इंसान की रहमत अलग होती है | कुछ के दर्द और आँसुओं की कोई औक़ात नहीं होती जबकि किसी की 'आह'(दर्द ) पर दुनिया सुबकती है | कुछ बिखर जाते हैं रस्ते में टुकड़े -टुकड़े होकर और रह से गुज़र रहे शख़्स के शिकन तक नहीं होती वहीँ कुछ पहुँचा देते हैं सलाख़ों के पीछे और आसानी से ज़मानत तक नहीं होती | ये अंतर न जाने क्यूँ है यहाँ, जबकि प्रभु की अदालत ऐसे भेदभाव से कभी सहमत नहीं होती | क्या कुछ फ़र्क है शेर ,चीते ,हिरण और मुर्गे ,बकरे के प्राणों में फिर इनकी रक्षार्थ प्रयासों में, एक सी हरक़त क्यों नहीं होती | हर जीव का जीवन ज़रूरी है ,सबकी जान का महत्व सम होना चाहिए  | कुछ भी हो ,कैसे भी हो बस जीव हत्या रुकनी चाहिए |

'मेरे शहर की सड़कें'(poem)

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  मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों , जो भी फेंकें कचरा ना ग़लती माफ़ हो|  हर बीमारी दूर रहे तो ,भीतर मन भी पाक हो  मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों |  खुले में ना कोई शौच करे ,न पशु विचरण  सर - ए -राह  हो  दूर देश में शहर ना ये बदनाम हो |  मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों  जो भी फेंके कचरा ना गलती माफ़ हो |  हो अतिथि सत्कार ,ना मेहमाँ  परेशां हो  हर विज़िटर  की नज़र में जयपुर खास हो|  मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों  जो भी फेंके कचरा न गलती माफ़ हो |  जो भी आये अधरों पर मुस्कान हो स्वच्छता से अब इसकी पहचान हो |  मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों  जो भी फेंके कचरा न ग़लती माफ़ हो | |  - (गीत ) स्वच्छ भारत अभियान हित समर्पित 

'बालिका'

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माँ  की  अल्मारी  मे  मेरे बचपन  का  कोई खिलौना  नही  मिलता गाँव  की  उन  गलियों  मे  अब  मेरा  कोई  ज़िक्र नही मिलता अब समझी  मै  बालिका  होने  का  मतलब ये  वो  है  जिसे  अपने  ही  घर  मे  अपना  हक नही  मिलता बेटे  की  ख्वाहिशें  जहाँ  सर्वोपरी  होती  हैं , बेटी  की  तमन्नाओं  को  कोई  दाम  नही मिलता. बड़ा  अजीब  सा  आलम  है  कि  कन्या  पूजन  भी  होता  है  मगर ,देवी  सा  उनको  सम्मान  नही  मिलता  . चरण -स्पर्श  भी  होते  हैं  नवरात्रों  मे  लेकिन ताउम्र  मन मे उनके  प्रति  वो  सुविचार  नही  मिलता . समझ  चुकी  हूँ  बालिका  होने  की  सज़ा  क्या  है , ये  वो तितली  ...