'मेरे शहर की सड़कें'(poem)

 


मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों ,

जो भी फेंकें कचरा ना ग़लती माफ़ हो| 

हर बीमारी दूर रहे तो ,भीतर मन भी पाक हो 

मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों | 

खुले में ना कोई शौच करे ,न पशु विचरण  सर - ए -राह  हो 

दूर देश में शहर ना ये बदनाम हो | 

मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों 

जो भी फेंके कचरा ना गलती माफ़ हो | 

हो अतिथि सत्कार ,ना मेहमाँ  परेशां हो 

हर विज़िटर  की नज़र में जयपुर खास हो| 

मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों 

जो भी फेंके कचरा न गलती माफ़ हो | 

जो भी आये अधरों पर मुस्कान हो

स्वच्छता से अब इसकी पहचान हो | 

मेरे शहर की सड़कें एकदम साफ़ हों 

जो भी फेंके कचरा न ग़लती माफ़ हो | | 

-

(गीत ) स्वच्छ भारत अभियान हित समर्पित 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो

भीतर की सुन्दर दुनिया में रहें'