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नारी हूँ मैं अबला नहीं( kavita)

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  चट्टानों से लिए हौसले, हर ग़म  से टकराऊँगी हूँ नारी पर कमज़ोर नहीं,हर विपदा को हराऊँगी   मुझमें विलय है साहस,शक्ति ,योद्धा जिसकी करते भक्ति, उदीयमान सूरज सी होकर अम्बर तक छा जाऊँगी . पतित -आचरण,दम्भी जन को शील-विनय सिखलाऊँगी . प्रेम , समर्पण दया भाव से जीवन को महकाऊँगी  स्वं से स्व का भाव भुलाकर परहित को मिट जाऊँगी. नव सृष्टि की बन सहयोगिनी नव सृजन मार्ग दिखलाऊँगी . नारी हूँ मैं अबला नहीं ये सबको बतलाऊँगी . -Anshu Chauhan

'फिर किसी बात पे नाराज़ है वो'(गज़ल)

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  फिर किसी बात पे नाराज़ है वो  मेरी खामोश निगाहों की आवाज़ है वो  फिर किसी बात पे नाराज़ है वो  1.ना ही मुझसे संभलता है उसकी बेरूखी का गम, ना ही मेरे  बिना भरता वो कदम ,   कई दिन से ताबियत नासाज़ है वो  फिर किसी बात पे नाराज है वो . 2.मुझपे इल्ज़ाम लगाकर,खुद को भगवान कहा करता है , मेरी मासूमियत से अंजान रहा करता है मुझको ठहरा गया गुनेहगार सा वो . - -अन्शु चौहान    

यूँही नहीं होती हैं रुसवाइयाँ ..(गज़ल )

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यूँही नहीं होती हैं रुसवाइयाँ दिल की,किसी   शख्स पर तो इल्ज़ाम होता होगा 1.भीड़ में भी तन्हा सा फिरता है आजकल वो , वक्त और हालात पर रोता है आजकल जो लड़खड़ाता हुआ उसका हर अल्फाज़ तो होगा . यूँही  नहीं होती हैं....... 2.रूह में सिमटी हुई यादों का बवंडर है ,प्यासी है  आरजू और दूर समन्दर है,बेबस सी हकीकत पर  सहमा सा हर जज़्बात तो होगा  यूँही नहीं होती है ... ..       -Anshu Chauhan