यूँही नहीं होती हैं रुसवाइयाँ ..(गज़ल )
यूँही नहीं होती हैं रुसवाइयाँ दिल की,किसी
शख्स पर तो इल्ज़ाम होता होगा
1.भीड़ में भी तन्हा सा फिरता है आजकल वो ,
वक्त और हालात पर रोता है आजकल जो
लड़खड़ाता हुआ उसका हर अल्फाज़ तो होगा .
यूँही नहीं होती हैं.......
2.रूह में सिमटी हुई यादों का बवंडर है ,प्यासी है
आरजू और दूर समन्दर है,बेबस सी हकीकत पर
सहमा सा हर जज़्बात तो होगा
यूँही नहीं होती है ... ..
-Anshu Chauhan

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