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भौतिकता के परे सुकून

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  कितना असंतोष था पहले ज़िंदगी में कि ये अचीव नहीं किया ,वो अचीव  नहीं किया ,कुछ करना है ज़िंदगी में. नाम शोहरत ,पैसा और ज़्यादा हो.... कितनी तृष्णा थी मगर न जाने कैसे और  कब ईश्वर ने अपनी तरफ़ मुझे खींच लिया। सारी भौतिक इच्छाएँ धीरे -धीरे ख़त्म होती जा रही हैं। जो चीज़ें पहले मुझे आकर्षित करती थीं अब मुझ पर कोई प्रभाव नहीं डालती। किसी भौतिक चीज़ में मेरा आकर्षण नहीं रहा है अब हालाँकि भौतिक चीज़ों में मेरा आकर्षण पहले से ही काफ़ी कम रहा है लेकिन अब तो नीरसता सी ही पैदा हो गई है। बस सांसारिकता को निभाना एक कर्त्तव्य ,प्रभु की आज्ञा पालन और उनकी इच्छा का सम्मान करना मात्र  है।  अब आकर्षण है तो प्रभु भक्ति में ,उनकी कथा  सुनने में ,उनसे सम्बंधित किसी भी चर्चा में। उनके स्वरुप दर्शन में. अब तो बाक़ी सब चीज़ें पागलपन ,अज्ञानता से उपजी भटकन लगती हैं। सच में ईश्वर से प्रेम ,तुम्हें ये सिखा देता है कि उससे सुखद ,उससे प्यारा  ,उससे श्रेष्ठ कोई अहसास इस सृष्टि में नहीं है। सब चीज़ें ,व्यर्थ हैं। सारी उपलब्धियां कोई मायने नहीं रखती। इतने सुखद अहसास ,इतनी प्यारी अनुभूति से इत...

राम और कृष्ण को सही से जाने

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  भगवान राम और कृष्ण जी के (मनुष्य रूप में) जीवन के  विभिन्न दुख भरे प्रसंगों को जो उनके कर्म फल से जोड़ कर देखते हैं वो भूल रहे हैं कि प्रभु राम और कृष्ण सामान्य इंसान नहीं  भगवान हैं और कर्म फल भोगना तो सामान्य इंसान की नियति है.तो भगवान राम और कृष्ण जी के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए रामचरितमानस और श्रीमद्भगवत् गीता को ज़रूर पढ़ना चाहिए,अन्यथा उनके ये विचार प्रभु के प्रति अपराध की श्रेणी में रखे जाएंगे. वास्त्विकता ये है कि सांसारिक  मनुष्यों को सही कर्म सम्बन्धी सही  दिशा निर्देशन देने  हेतु,भगवान  विभिन्न लीलाओं के माध्यम से उन्हे शिक्षित करने की कोशिश करते हैँ. कर्म फल भोगना तो इंसान का काम होता है. कृष्ण तो परम शक्ति हैं, कृष्ण तो  जगन्नाथ अर्थात सम्पूर्ण जगत के नाथ हैं.सृष्टि संचालक हैं ,और सृष्टि संचालक के लिए भी अगर कोई कर्म फल भोगने  जैसे भाव रखकर देखता है तो अल्पज्ञानी है वह व्यक्ति. कृष्ण और राम तो सृष्टि के पालन करता भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। व स्वं  सृष्टि के पालन करता हैँ. जय श्री राधे कृष्णा 🙏  ...

'हाय -हाय छोड़ो '

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  हे सभी धार्मिक मनुष्यों !अगर आप अपनी भारतीय संस्कृति में विश्वास करते हो तो अब आप  अंग्रेजी  के 'हाय' शब्द  की जगह नमस्ते, जय श्री कृष्ण ,जय श्री राधे ,जय श्री राम  सम्बोधन का उपयोग करेंगे.वास्तव में कारण  ये  हैं कि  अंग्रेजी  का 'हाय' हिन्दी के 'हाय ' से पूर्णतया भिन्न है.मुझे मालूम है कि 'hi'  की फुल form  के हिसाब से ये शब्द ग़लत नहीं है इसका simple सा अर्थ है 'हाउ आर यू '= 'आप कैसे हैं'.लेकिन हिन्दी का 'हाय'  बहुत ही ग़लत या नेगेटिव शब्द है ज़िसका मतलब 'बद्दुआ' से होता है तो सुबह शाम इस तरह के नकारात्मक शब्द को अपनी ज़ुबान पर लाने से बचें.नमस्ते ,प्रणाम ,जय श्री कृष्णा,जय श्री राधे,जय श्री राम,आदि सम्बोधनों  को अपनायें.इसे पुराने, रूढ़ीवादी ,दकियानूसी विचारों का नाम देकर ये मत भूल जाना कि जीभा पर बार-बार आने वाला ग़लत शब्द कभी ना कभी ग़लत प्रभाव दिखा ही देता है.इसलिए जीभा पर अच्छे शब्द लायें व उन्ही का नित्य प्रयोग करें.एक तरफ जहां विदेशी लोग नमस्ते ,प्रणाम आदि शब्दों को अपनाने में गर्व का अनुभव कर रहे हैं वहीं हम अपन...