आज हिंदी दिवस पर अपनी इस प्यारी भाषा की तारीफ में मैं भी कुछ कहना चाहती हूँ ,हिंदी एक बहुत ही समृद्ध व भावपूर्ण भाषा है । किसी भी भाषा में इस भाषा के जैसी अभिव्यक्ति क्षमता नहीं है । इस भाषा का एक शब्द ही तमाम आशयों की पुष्टि कर देता है । आज के दौर में इस भाषा के प्रति लोगों की उपेक्षित सोच बड़ी ही चिंता - जनक व आश्चर्य जनक है । इतनी सक्षम व उन्नत भाषा के प्रति लोगो के इस रवैये को हमे बदलना होगा ।हिंदी भाषी होना कभी भी किसी की योग्यता को निम्न स्तरीय नहीं बना सकता । देश में तमाम ऐसे विद्वान लोगों के उदाहरण हैं जिन्होंने हिंदी भाषा को अपनाकर देश -दुनिया में अपना विशेष स्थान बनाया है । कई लेखक ,संपादक ,पत्रकार गीतकार ऐसे हुए हैं जिनको हिंदी भाषा ने ही प्रमुख पहचान दिलायी है । प्रसून जोशी जी (गीतकार )भी ऐसे ही एक शख्सियत हैं । हिंदी भषा को लेकर इनके विचार निश्चित ही सराहनीय हैं ।इनका कहना है कि अंग्रेजी मेरा हुनर है । भाषा तो मेरी हिंदी ही है । भाषा माँ होआज हिंदी दिवस पर अपनी इस प्यारी भाषा की तारीफ में मैं भी कुछ कहना चाहती हूँ ,हिंदी एक बहुत ही समृद्ध व भावपूर्ण भाषा है । किसी भी भाषा में इस भाषा के जैसी अभिव्यक्ति क्षमता नहीं है । इस भाषा का एक शब्द ही तमाम आशयों की पुष्टि कर देता है । आज के दौर में इस भाषा के प्रति लोगों की उपेक्षित सोच बड़ी ही चिंता - जनक व आश्चर्य जनक है । इतनी सक्षम व उन्नत भाषा के प्रति लोगो के इस रवैये को हमे बदलना होगा ।हिंदी भाषी होना कभी भी किसी की योग्यता को निम्न स्तरीय नहीं बना सकता । देश में तमाम ऐसे विद्वान लोगों के उदाहरण हैं जिन्होंने हिंदी भाषा को अपनाकर देश -दुनिया में अपना विशेष स्थान बनाया है । कई लेखक ,संपादक ,पत्रकार गीतकार ऐसे हुए हैं जिनको हिंदी भाषा ने ही प्रमुख पहचान दिलायी है । प्रसून जोशी जी (गीतकार )भी ऐसे ही एक शख्सियत हैं । हिंदी भषा को लेकर इनके विचार निश्चित ही सराहनीय हैं ।इनका कहना है कि अंग्रेजी मेरा हुनर है । भाषा तो मेरी हिंदी ही है । भाषा माँ होती है । माँ के बाल भी खींच सकते हैं आप । माँ से आप लिबर्टी ले सकते हैं । अंग्रेजी से मैं लिबर्टी नहीं ले सकता । इनका कहना है कि जब ये शुरुआती दौर में अंग्रजी भाषी लोगों से खुद के लिए' वर्नाकुलर पर्सन '(वर्नी )शब्द सुनते थे तो आहत होते थे । एक और शब्द एच एम टी (हिंदी मीडियम टाइप )का प्रयोग हिंदी भाषियों को उपेक्षित दिखाने के लिए किया जाता था जो इन्हें अच्छा नहीं लगा था । इसलिए आज इन्होंने अपनी उसी भाषा का गौरव अपने हासिल मुकाम से बढ़ा दिया है । अब अंग्रेजी इनकी हिंदी योग्यता के सामने क्या मायने रखती है?यदि योग्यता का आंकलन अंग्रेजी भाषा से ही होता है तो कई ऐसी जगहें हैं जहाँ सब्ज़ी बेचने वाले ,चाय बनाने वाले और झाडू -पोछा करने वाले भी बहुत अछि हिंदी बोल लेते हैं । ती है । माँ के बाल भी खींच सकते हैं आप । माँ से आप लिबर्टी ले सकते हैं । अंग्रेजी से मैं लिबर्टी नहीं ले सकता । इनका कहना है कि जब ये शुरुआती दौर में अंग्रजी भाषी लोगों से खुद के लिए' वर्नाकुलर पर्सन '(वर्नी )शब्द सुनते थे तो आहत होते थे । एक और शब्द एच एम टी (हिंदी मीडियम टाइप )का प्रयोग हिंदी भाषियों को उपेक्षित दिखाने के लिए किया जाता था जो इन्हें अच्छा नहीं लगा था । इसलिए आज इन्होंने अपनी उसी भाषा का गौरव अपने हासिल मुकाम से बढ़ा दिया है । अब अंग्रेजी इनकी हिंदी योग्यता के सामने क्या मायने रखती है?यदि योग्यता का आंकलन अंग्रेजी भाषा से ही होता है तो कई ऐसी जगहें हैं जहाँ चाय बनाने वाले और झाडू -पोछा करने वाले भी बहुत अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हैं । उन्हें उच्च पद क्यों नहीं प्राप्त होते ?
मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो
मृत्यु के भय से अगर सही को सही और गलत को गलत ना कह सको,तो सन्देह करो अपने मनुष्य होने पर . शक्तिशाली हो कर अगर किसी निर्बल की शक्ति न बन सको,तो संदेह करो अपने शक्तिशाली होने पर. संपन्न हो कर अगर मदद ना कर सको किसी निर्धन की,तो सन्देह करो अपनी सम्पन्नता पर . पुरुष हो कर अगर किसी नारी के सम्मान की रक्षा न कर सको,तो संदेह करो अपने पौरुष पर। धार्मिक हो कर भी अगर धर्म की रक्षा न कर सको, तो धिक्कार तुम्हारे धार्मिक होने पर. मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो इस धरा पर, सिर्फ देह मनुष्य की होना ही मनुष्यता नहीं, समझो इस ध्येय को तो इंसान हो तुम ना समझो तो चारा चर रहो कही। -
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