इट हैप्पेंस ऑनली इन इंडिया






हमारे इस प्यारे देश में कुछ न कुछ अजीबोग़रीब घटता ही रहता है । सभ्यता -संस्कृति और संस्कारों को महत्व  देने वाले इस देश की कुछ बातें समझ से बिल्कुल परे  हैं जैसे की यहाँ सलवार- कुर्ता ,साड़ी में लिपटी नारियां ही सभ्य मानी  जाती हैं । जीन्स-टी-शर्ट वाली भारतीय परम्परा के ख़िलाफ़ । लेकिन टी-शर्ट पर आपने चुन्नी डाल ली है तो आप सभ्य की श्रेणी में आ सकते हैं । चुन्नी की भारतीय परंपरा में इतनी महत्ता है कि आप नाईट -ड्रेस के पजामा -कुरता पर चुन्नी लगा ले ,शॉर्ट के ऊपर चुन्नी लगा ले तो किसी की मज़ाल आप को असभ्य घोषित कर दे ।

 दूसरी विरोधाभाषी चीज़ ये कि यंहा शादी के बाद सलवार कुर्ता पहनने वाली स्त्रियों को भी कुछ घरों में असभ्य माना जाता है । सलवार-कुर्ता पहनने वाली स्त्री को समझा जाता हैं कि वह भारतीय परम्परा के ख़िलाफ़ जा रही है ,और कुछ  ज़्यादा ही आधुनिक बन रही है ।

 अरे भई अब इसमें मॉडर्निटी और अपरम्परावादी क्या हो गया ?इस पहनावे में कहाँ शालीनता भंग हो गई । इसमें तो पूरा शरीर ढका हुआ होता है ना और भारतीय परिधान भी है ये । 

मेरी दृष्टि में तो जीन्स में भी कोई दोष नहीं होता है क्योंकि जीन्स-शर्ट में भी पूरा शरीर ढका हुआ होता है । बात सिर्फ़ सोच की है हम साड़ी को भारतीय समाज में शालीन पहनावे का ख़िताब देते हैं लेकिन जहाँ तक मेरा आंकलन है साड़ी में जितना शरीर प्रदर्शन होता है उतना न तो जीन्स टी-शर्ट में होता है न ही सलवार-कुर्ते में । साड़ी  में कटि-भाग व ब्लाउज़ का डीप बैक कहीं ज़्यादा शालीनता हीन लगते हैं लेकिन जो धारणाएं व सोच मनुष्य के भीतर तक पैठ कर गई हों उन्हें बदलना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा होता है । 

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