भावावेश घातक है ..
भावावेश में लिए गए निर्णय बहुत घातक सिद्ध होते हैँ .भावावेश तो विपरीत परिस्थितियों से उत्पन्न क्षणिक ही होता है और कुछ समय बाद सामान्य हो जाता है परंतु उस समय विशेष में लिया गया ग़लत निर्णय पूरी ज़िन्दगी बर्बाद कर देता है .इसलिए कभी भी , किसी परस्थिति में आवेश में आकर निर्णय न लें . विश्वास रखिए जिस तरह अनुकूल समय हरवक्त नहीं रहता ,उसी तरहा प्रतिकूल समय भी हरवक्त नहीं रहेगा .ज़िन्दगी को आशान्वित होकर जिए .समय भी अनुकूल हो जाएगा .खुद को टूटने ना दें ,बिखरने ना दें.यही ज़िन्दगी को जीने का सही नज़रिया है .

भावावेश में लिया गया निर्णय स्वयं का निर्णय न हो कर आवेश में लिया गया निर्णय होता है जिसे उचित और अनुचित का पता नही होता ।जहाँ उचित और अनुचित का अनुमान ना हो वह निर्णय निर्णय लेने वाले का ना होकर विकार के कारण उत्तपन भाव का होता है जो व्यक्ति के स्वयं के लिए व समाज दोनों के लिए घातक होता है अतः कोई भी निर्णय लेने से पूर्व उसके परिणाम पर विचार अवश्य करे ।
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