"उम्र का ढलना "
उम्र का ढलना कोई त्रासदी तो नहीं
जो हर शख्स चिंता जताता है कि उम्र बढ़ रही है
बच्चे से बड़े होने का जश्न हो तो , बड़े से बूढ़े होने का कैसा गम
बुढ़ापा तो कितना संपन्न होता है
बचपन ,जवानी के अनुभव लिए
आसक्ति से विरक्ति की ओर ,
बंधन से मुक्ति की ओर .
फिर उसका शोक नहीं जश्न होना चाहिए .
जीवन भार नहीं आभार होना चाहिए .
यात्रा का अंतिम चरण प्रथम से अहम् होना चाहिए .
मोह रहित ,व्यसन रहित,प्रभु भक्ति में लीन मगर मन होना चाहिए.
- अंशु चौहान

बहुत खूब
जवाब देंहटाएंBahut shukriya
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