योगी
अस्त-व्यस्त हो जो,व्यवस्था बदल सकता है
प्रचारित हो ग़लत,वो असत्य बदल सकता है
मौन हो जहां धर्म,आक्रोश उगल सकता है
कौन कहता है योगी का कर्म सिर्फ 'योग' है
परमार्थ हित एक योगी,सत्ता बदल सकता है.
-अंशु चौहान
मेरे इस इंद्रधुनषी रंगों वाले ब्लॉग में किसी 'विषय' विशेष को लेकर रचनाएँ नहीं लिखी गई हैं ,बल्कि मनुष्य के मन में उठने वाले हर भावों और समाज से जुड़ी हर घटनाओं ,हर समस्याओं ,उससे जुड़े खट्टे -मीठे अनुभवों को लेकर ही समस्त रचनायें की गई हैं.जीवन के हर रंग,हर पहलू को अनुभव करने के लिए मेरे ब्लॉग से जुड़े रहें |
अस्त-व्यस्त हो जो,व्यवस्था बदल सकता है
प्रचारित हो ग़लत,वो असत्य बदल सकता है
मौन हो जहां धर्म,आक्रोश उगल सकता है
कौन कहता है योगी का कर्म सिर्फ 'योग' है
परमार्थ हित एक योगी,सत्ता बदल सकता है.
-अंशु चौहान
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