'सत्य ज्ञान'
अगर भरपूर संपत्ति होते हुए भी आपके मन में अशांति है तो वास्त्विकता में आप बहुत बड़े गरीब हैं ,अगर उच्च शिक्षित होते हुए भी आपको आध्यात्मिकता का ग्यान नहीं है तो आप अशिक्षित हैं.मनुष्य होकर भी आप अगर अपने भौतिक शरीर हेतु ही सब प्रयास कर रहें हैं और आत्मा हेतु नहीं तो आपका जीवन पशु से कदापि भिन्न नहीं हैं.इसलिए मनुष्य देह रहते इस जीवन को प्रभु भक्ति और आध्यात्म में लगा लीजिए। हर कर्म प्रभु की खुशी हेतु करे.अगर जिंदगी में असली खुशी और शांति चाहते हो तो प्रभु की तरफ भागो भौतिक चीजों की तरफ नहीं. ।अगर जॉब प्राप्ति वाला ज्ञान असली ज्ञान होता तो आज सभी लोग सुखी होते मगर आज लोग जितने ज्यादा शिक्षित हैं उतने ही दुखी और असंतोष से ग्रसित हैं .सच तो ये है कि ये सही ज्ञान नहीं है ज्ञान वो है जो हमारा आत्मिक उत्थान करता है।जो प्रभु से हमें जोड़ता है। जो मनुष्य जन्म की सार्थकता हेतू हमें तैयार करता है।आपके पास जो भी प्रतिभा या ज्ञान है उसको प्रभु सेवा हेतु सबके कल्याण में लगा दोजिए। ईश्वर आपके ज्ञान को आध्यात्मिक और कल्याणकारी बना देंगे।

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