हर वक्त की खामोशी भी अच्छी नहीं होती





घरेलु हिंसा या डोमेस्टिक वायलेंस एक ऐसी हिंसा है जो सार्वजनिक रूप से तो उजागर नहीं हो पाती है लेकिन भीतर ही भीतर इतनी मज़बूती से जम जाती है कि  इसके शिकार व्यक्ति की ज़िंदगी को  ये नर्क बना देती है। घरेलु हिंसा का सबसे दुःखद पहलू ये है कि इसमें व्यक्ति अपने ही घर में असुरक्षित और भयभीत सा महसूस करता है। वह अपने ही किसी रिश्तेदार के अत्याचार का शिकार होता है। वह चाहकर भी उसका विरोध नहीं कर पाता है। अपने परिवार की प्रतिष्ठा के लिए वह चुपचाप अपने को कुर्बान करने को तत्तपर रहता है। सब कुछ सुनकर ,सहकर देखकर भी अनजाना बना रहता है लेकिन ऐसा करना वास्तविकता में बहुत ग़लत है। 

किसी के साथ अन्याय को करना व सहन करना  दोनों  ही  ग़लत बताये गए हैं । अगर किसी के साथ घर में कोई भी ऐसा व्यवहार हो रहा है जो नैतिक दृष्टि से ग़लत है तो उसे मत सहिये। स्वं विरोध कीजिये और संभव न हो तो कानून की मदद लीजिये। इस दुनिया में भगवान ने सभी को स्वतंत्र व सम्मान से जीने का हक़ दिया है। अगर कोई भी भावनात्मक तरीके से या अन्य किसी भी तरीके से तुम पर हावी होने की कोशिश कर रहा है तो उसका सामना कीजिये ,अगर वो ग़लत है तो आपको उससे डरने की ज़रूरत नहीं है। 

घरेलु हिंसा से बचने के लिए भी बहुत से अधिकार हैं उनका सहारा लीजिए। अगर कोई नैतिक मर्यादा का उल्लंघन कर रहा है ,कोई रिश्ते की मर्यादा के विरुद्ध आचरण कर रहा है ,या किसी भी तरह का शोषण कर रहा है ,आपके सम्मान को डेस पहुँचा रहा है तो उसके इस व्यवहार को प्रोत्साहित मत होने दीजिये। उसे तुरंत वहीँ रोक दें। घरेलु हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत महिलायें अपने अधिकारों हेतु लड़ सकती हैं। वहीँ छोटे बच्चों को भी अधिकार दिए गए हैं जिसमें बाल श्रम को कानूनी अपराध मानते हुए उनकी स्वतंत्रता और पढ़ाई आदि के अधिकार सुरक्षित किये गए हैं।

 ये याद रखिये कानून से बढ़कर यहाँ कोई ताक़तवर नहीं है और उससे भी बड़ी ताकत है वो भगवान .तो अगर आप उसमें विश्वास रखते हैं तो आपको किसी भी ग़लत ताक़त से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उसके सामने किसी की कोई औक़ात नहीं है चाहे वो कितना ही ताकतवर क्यों न हो। इसलिए झुकना है तो बस प्रभु के सामने,नैतिकता के सामने ना की किसी ग़लत व्यक्ति या अनैतिकता के सामने। 


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