कर्मा
सृष्टि में जितने भी इंसान हैं सब प्रभु की मर्जी से प्रकट हुए हैं .लेकिन साथ ही सब अपना अपना प्रारब्ध, संचित कर्म लेकर चल रहे हैं।मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ योनि मानी जाती है।अन्य सारी योनि तो भोग योनि है लेकिन मनुष्य योनि ही ऐसी योनि है जो अपने वर्तमान कर्मों के हिसाब से अच्छा या बुरा फल भोगती है और अच्छे कर्म करके ईश्वर की प्राप्ति भी कर सकती है इस योनि में जो भी कर्म करे बहुत सोच समझ कर करे। क्योंकि इस योनि में अगर आपने ईश्वर प्राप्ति नहीं की तो आपको अनेक योनियों में भटकना बढ़ेगा।मनुष्य शरीर पाकर इसलिए कोई भी गलत कर्म न करें.आप जिसके प्रति भी गलत कर्म करेंगे वो किसी ना किसी रूप में आपके सामने अगले जन्म में प्रकट होता रहेगा।इसलिए मोह का नाश करते हुए, विवेकशील बनते हुए हमें अध्यात्म और ईश्वर से जुड़कर अपनी जिंदगी सिर्फ कर्तव्य निर्वाह के लिए जीनी है.किसी की भी आत्मा को दुखाना या ईश्वर द्वार निर्मित इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति की शारीरिक कमज़ोरी या मानसिक कमज़ोरी का उपहास करना, मज़ाक उड़ाना बहुत घातक हो सकता है .यहां जिसको जो स्थिति मिली है सब अपने कर्मनुसर मिली है।इसलिए आप जिसका भी मजाक बनाते हो, जिसके प्रति गलत भाव रखते हो उस भाव के
अनुरूप आपका अगला जन्म बिगडने लगता है।
मनुष्य योनि को इसलिए व्यर्थ न जाने दें इसे सही दिशा दे और मनुष्य जीवन को सफल बनाएं।
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