कोई है जो बुलाता है
किसी अहसास को हरपल करीब पाती हूँ मै
तन्हा जब भी होती हूँ ,उससे बतियाती हूँ मै
कहीं कुछ अधूरा सा ,छूटा हुआ है दिल के कोने में
कौनसी दुनिया है जिसे बड़ी हसरत से खोजना चाहती हूँ मै ।
पागल ना हो जाऊं इतना सताता है क्यों
खुद को भूल जाती हूँ इतना याद आता है वो
मेरे खयालों में ही बस चंद तस्वीरें हैं उसकी
जमीं पर कहाँ हकीकत है ऐसी
जिसे बेख़बर ढूँढना चाहती हूँ मै ।
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