मौन_अभिव्यक्ति

मेरी मूक अभिव्यक्ति करती गूढ़ रहस्य उदघाटित

भावों की शक्ति करती है मन को मेरे संचालित ।

प्रश्न -चिन्ह है मुखमुद्रा पर बोधगम्य है चिंतन

श्वासों का क्रम उल्टा -सीधा अवसादित है तन-मन

आशय खोजता है मन मेरा जिज्ञासा आच्छादित

पर उलझा जाता है पल-पल उलझन में अबाधित

किंचित भी उल्लास न मिलता हर्षित हो कर भी  मन न हँसता

 अंतरमन  में जटिलताओं की लहरें होती प्रवाहित

 रोकती हैं तृष्णाएँ असीमित होने से उल्लासित

मैं प्रतिबद्ध हूँ मौन भंग कर,न शब्द करूँ उच्चारित

आत्म-द्वन्द की इस क्रीड़ा  में , छल को करूँ पराजित॥

  

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