''नव वर्ष "(poem)
लिए हाथ मे थाल तुम्हारा अभिनन्दन करती हूँ
रहो श्रेष्ठ गत वर्ष से ज्यादा ये वन्दन करती हूँ
बीते साल के स्वप्न अधूरे, तुमको पूरे करने हैँ
मेरी ख्वाबों की दुनिया मे ,रंग हकीकत के भरने हैँ
भूलूँ साल पुराना पल मे ,तुम उससे ज़्यादा दे जाना
भूतकाल को विस्मृत कर दूँ ,तुम इतने सुख दे जाना .
वर्तमान मे जीना हर पल ,ये ही तो समझदारी है
तुम संभालो अब अपनी सत्ता ,तुम्हारी ज़िम्मेवारी है .
-अंशु चौहान

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